संसद का मानसून सत्र गतिरोध के साथ ही शुरु हुआ और विपक्ष कांग्रेस के रुख को देखते हुए यह निश्चित ही लगता है कि यह पूरा सत्र ही सुषमा स्वराज-वसुन्धरा राजे-ललित मोदी प्रकरण और व्यापमं पर शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की राजनैतिक उग्रता से ही खत्म भी होगा. 21 जुलाई को सत्र के आरंभ होते ही लोकसभा में दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि के साथ बैठक उठ गयी. राज्यसभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग ललित मोदी प्रकरण पर की गयी. विपक्ष का कहना था कि इस मामले में अनुचित आचरण करके श्रीमती स्वराज ने उसे ब्रिटिश डाक्यूमेन्ट प्रदाय कराये और अब कहा यह जा रहा है कि उसकी पत्नी का पुर्तगाल में कैंसर का आपरेशन था और मानवीय आधार पर उसकी मदद की गयी थी. लेकिन पुर्तगाल सरकार की तरफ से भी यह खुलासा हो गया है कि ऐसा कोई आपरेशन नहीं था. साथ ही वीडियो व फोटो में यह जाहिर हो गया है कि उस अवधि में ललित मोदी विदेशों में अय्याशी का पर्यटक बना घूम रहा था.
सरकार का कहना था कि इस मामले पर पहले चर्चा हो जाए. श्रीमती स्वराज इस पर अपना पक्ष रखते हुए बयान देगी और उस पर राज्यसभा में बहस हो. लेकिन विपक्ष इस बात पर अड़ा रहा कि श्रीमती स्वराज पहले इस्तीफा दे. सदन की समिति इस मामले पर जांच करे. यह भी सुझाव आया कि सुषमा-ललित मोदी प्रकरण में न्यायिक जांच भी हो सकती है.

सरकार के पक्ष में यह बात तो दमदार व असरदार लगती है कि राज्यसभा की कार्यवाही इस पर चर्चा से प्रारंभ की जाए, लेकिन विपक्ष इस पर तैयार नहीं है और पहले इस्तीफा पर अड़ गया है.

कांग्रेस के सांसद श्री गुलाम नवी आजाद सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी को उसी का आईना दिखा रहे हैं जो संसदीय आचरण उन्होंने विपक्ष में रहने के समय 2-जी स्पेक्ट्रम पर किया था. जिसमें संसद के दो मानसून व शरद सत्र इसी हंगामे में व्यर्थ कर दिये गये थे. मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले के बारे में उन्होंने कहा कि अब तक जितने भी घोटाले हुए हैं व्यापमं घोटाला उनकी दादी है. इसमें हुई मौतों के लिए कौन जिम्मेवार है. अब तक 40 ऐसे लोगों की हत्या हो चुकी है जो इसमें गवाह व साक्ष्य थे. इन्हीं कारणों से कांग्रेस राष्टï्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व के निर्वहन में सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे व शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग पर दृढ़ता से कायम है.

ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस की संसदीय रणनीति यह रहने वाली है कि सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे, ललित मोदी प्रकरण पर राज्यसभा को और शिवराज सिंह चौहान-व्यापमं प्रकरण को लोकसभा में केंद्रित किया जाए.

व्यापमं में मौतों का सिलसिला जारी है. अभी फिर जमानत पर गये व्यापमं अभियुक्त विजय पटेल रायपुर के एक होटल में मृत पाया गया. सीबीआई का संदेह है कि यह भी हत्या है और संभावना है कि वह जांच में इसे भी ले ले. खुलासा करने वाले डाक्टर आनंद राय ने मध्यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं. व्यापमं घोटाला लगातार गहराता और फैलता जा रहा है. संसद में भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार भी उसी कठिन स्थिति में आने जा रही है जिन परिस्थितियों में उनसे स्पेक्ट्रम पर यूपीए की मनमोहन सरकार को लपेटा था. भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘अपना किया सामने आ रहा हैÓ. ललित मोदी व व्यापमं पर सुषमा-वसुंधरा व शिवराज कटघरे में तो आ ही गये हैं इनकी सफाई ही इन्हें सफा करती दिख रही है. संसद में लंबे अरसे से सभी पार्टियों की सरकारों में विकास और रचना के काम कम और घपले ही घपले सामने आते रहे हैं. कल वो थे आज ये हैं. जनता में यही धारणा बन रही है कि सब एक से हैं- सब भ्रष्टï हैं.

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