संसद में गतिरोध बराबर बना हुआ है. बात बनते-बनते बिगड़ जाती है और हंगामा यथावत हो रहा है. यहां गालिब चरितार्थ हो रहे हैं कि ‘क्या बने बात जहां बात बनाये न बनेÓ. 12 अगस्त को हंगामों में राज्यसभा कल के लिये और लोकसभा दोपहर एक बजे तक स्थगित हुई. फिर यह स्थिति बनी कि नेता कांग्रेस पक्ष श्री मल्लिकार्जुन खडगे स्थगन प्रस्ताव रखेंगे और उस पर चर्चा होगी. चर्चा शुरू होते ही आशा बंधी कि अब सब कुछ सामान्य हो गया. लेकिन श्री खडके के भाषण के दौरान ही सत्तापक्ष भारतीय जनता पार्टी ने इतना हंगामा किया कि सदन कुछ समय के लिये स्थगित करना पड़ा.

श्री खडगे मुख्य रूप से सुषमा स्वराज- ललित मोदी प्रकरण पर बोल रहे थेे. लेकिन मोदी को ब्रिटेन में ट्रेवल डाक्यूमेंट लेने में श्रीमती वसुन्धरा राजे ने भी मदद पहुंचायी थी. इसलिए जब उनका नाम भी लिया तो सत्तापक्ष भाजपा ने इस पर आपत्ति जताई और हंगामा कर दिया. इस पर कांग्रेसी भी भड़क उठे और संभवत: लोकसभा में पहली बार ही ऐसा हुआ है कि श्रीमती सोनिया गांधी भी अध्यक्षीय आसंदी के समक्ष आकर सत्तापक्ष के रवैये पर विरोध करने लगी. इसी समय स्पीकर सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. कुछ समय बाद सदन में श्री खडगे ने अपना भाषण पूरा किया और स्पीकर श्रीमती महाजन ने श्रीमती सुषमा स्वराज को यह कहते हुए बोलने को कहा कि सरकार का जवाब नहीं है बल्कि श्रीमती स्वराज का व्यक्तिगत स्पष्टीकरण है.

कांग्रेस पक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया. संभवत: यह भी लोकसभा में पहली बार ही हुआ लगता है जब किसी स्थगन प्रस्ताव पर सरकार की तरफ से न बोला गया और किसी संबंधित सदस्य ने व्यक्तिगत स्पष्टïीकरण के रूप में उस स्थगन प्रस्ताव का जवाब दिया है. कांग्रेस के सदस्य बजाय श्री स्वराज को सुनने के सदन में शासकीय जबाव में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जवाब देने की मांग करते हुए लगातार नारे लगाते रहे. स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा होने से जो स्थिति बनती नजर आ रही थी और स्थगन प्रस्ताव के जवाब की प्रक्रिया पर उससे ज्यादा बिगड़ गयी. कांग्रेस की नारेबाजी के बीच ही श्रीमती स्वराज अपना भाषण देती रहीं.
मानसून सत्र को मात्र दो दिन बचे हैं और लगता है पूरा मानसून सत्र दूसरी बार व्यर्थ चला जायेगा. पहली बार यू.पी.ए. के शासन काल में स्पेक्ट्रम पर जे.पी.सी. की मौत पर पूरा मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया था.

इस बार सदन में दो बातें तर्कपूर्ण नहीं लगती हैं. ललित मोदी को ब्रिटेन में ट्रेवल डाक्यूमेंट पाने में श्रीमती वसुंधरा राजे ने भी मदद पहुंचाई- तब चर्चा में उनका नाम लिया जा सकता है- तब भी भाजपा पक्ष इसका विरोध कर रहा है. दूसरा स्थगन प्रस्ताव पर सरकार ही जवाब देती है. उससे व्यक्तिगत स्पष्टïीकरण नहीं होता. लेकिन चर्चा को स्थगन प्रस्ताव को रखने वाले श्री मल्लिकार्जुन व श्रीमती स्वराज तक सीमित
रखा गया.

एक तरफ तो श्री खडगे को वसुंधरा राजे का नाम या उल्लेख करने से रोका गया और दूसरी ओर श्रीमती स्वराज को छूट दी गयी और उन्होंने अपने भाषण में भूतपूर्व कांग्रेसी वित्त मंत्री श्री पी. चिदम्बरम् और उनकी पत्नी की इनकम टैक्स द्वारा वकील नियुक्त करने का प्रकरण और भोपाल के यूनियन कार्बाइड कांड पर एंडरसन को भोपाल से जाने देने में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी का उल्लेख करने दिया गया. संसद में अलग-अलग मानदंड नजर आ रहे हैं. मामला खिंचता दिखाई दे रहा है. संसद में व्यापमं पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की भी मांग उठायी गयी.

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