नयी दिल्ली,

संसद के शीतकालीन सत्र के समय पर नहीं होने को लेकर सत्तारूढ दल और विपक्ष के बीच चल रहे आरोप प्रत्यारोप के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज फिर कहा कि संसद सत्र विधानसभा चुनाव के कारण पहले भी देर से होते रहे हैं जबकि कांग्रेस ने उस पर गलत बयानी करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के कल के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके इस कथन में जरा भी सच्चाई नहीं है कि गुजरात में पिछले विधानसभा चुनाव के समय संसद का शीतकालीन सत्र समय पर नहीं हो सका था।

कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 2012 में शीतकालीन सत्र निर्धारित समय 22 नवंबर से 13 दिसम्बर तक आयोजित किया गया था। इसी दौरान हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभाओ के चुनाव हुए थे।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस की आलोचना को गलत बताया और कहा कि पहले भी अहम चुनाव होने पर संसद के सत्र की तारीखों में फेरबदल किया गया है।

उन्होंने कहा कि जब -जब अहम चुनाव होते हैं ,सांसद एवं राजनीतिक दलों के नेता चुनाव प्रचार में व्यस्त होेने के कारण खुद ही संसद का सत्र टालने की अपील करते हैं और इसकी तिथियों में बदलाव किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि शीतकालीन सत्र गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद हो।

संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के वास्ते कांग्रेस ने आज अपने दिग्गज नेताओं गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खडगे और आनंद शर्मा को उतारा। कांग्रेस नेताओं पार्टी मुख्यालय में आयोजित विशेष संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें संसद और लोगों की समस्याओं की चिंता नहीं है।

उन्हें सिर्फ चुनाव की चिंता है और इसके लिए उन्होंने खुद को और अपने पूरे मंत्रिपरिषद को चुनावी मशीनरी में तब्दील कर दिया है और चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी का खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि श्री जेटली और भाजपा के अन्य नेता संसद सत्र को लेकर गलत बयानी कर रहे हैं तथा लोगों को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि गुजरात विधानसभा चुनाव के बीच उसे संसद में जनता से जुडे सवालों के जवाबों का सामना करना पड़े और उसकी कमियां उजागर हो इसलिए वह शीतकालीन सत्र को नहीं बुला रही है।

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