jayshankerनयी दिल्ली,  विदेश सचिव एस जयशंकर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता के लिए समर्थन जुटाने की मुहिम के तहत आज दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल रवाना हो गए। सोल में एनएसजी की दो दिवसीय समग्र बैठक कल से शुरु हो रही है। इस बैठक में भारत की सदस्यता पर विचार किए जाने की संभावना है। चीन इस प्रतिष्ठित क्लब में भारत को शामिल किए जाने का विरोध कर रहा है।

उसकी दलील है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं इसलिए उसे इसकी सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए। उसका यह भी कहना है कि यदि भारत को शामिल किया गया और पाकिस्तान को दूर रखा गया तो इससे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। चीन की ओर से सोमवार काे यह बयान आया था कि सोल बैठक के एजेंडे में भारत की सदस्यता का मसला शामिल नहीं है हालांकि कल जारी बयान में उसने कहा कि इस मसले पर चर्चा के दरवाजे खुले हुए हैं।

चीन के विरोध पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि चीन भारत की सदस्यता का विरोध नहीं कर रहा है बल्कि उसका विरोध प्रक्रियात्मक मानदंडों को लेकर है। चीन को मना लिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दो दिन बाद ताशकंद में शुरु हो रहे शंघाई सहयोग शिखर बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग से मुलाकात होगी । हकीकत यह है कि एनएसजी का गठन 1974 में भारत द्वारा पहले परमाणु परीक्षण को देखते हुए ही किया गया था। पाकिस्तान आैर चीन इसी बात का हवाला देकर इसमें भारत की सदस्यता का विरोध कर रहे हैं। हालांकि इस मसले पर अमेरिका ने भारत का समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा के दौरान भारत एनएसजी के सदस्यों स्विट्जरलैंड और मेक्सिको समेत कई अन्य देशों का समर्थन जुटाने में भी सफल रहा है। एनएसजी सर्वसम्मति के सिद्धांत के तहत काम करता है और भारत के खिलाफ किसी एक भी देश का वोट उसकी दावेदारी को कमजोर कर सकता है। भारत परमाणु प्रौद्योगिकी के वैश्विक व्यापार का नियमन करने वाली संस्था एनएसजी की सदस्यता के लिए इस समूह के सदस्य देशों से समर्थन इसलिए मांग रहा है क्योंकि इसके सदस्य देशों को परमाणु प्रौद्योगिकी के व्यापार और निर्यात की अनुमति होती है।

इस समूह की सदस्यता उसके लिए घरेलू परमाणु उर्जा कार्यक्रम के वास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार के दरवाजे खोल सकती है। भारत पिछले कई साल से इस एनएसजी की सदस्यता के लिए प्रचार कर रहा है। लेकिन सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन उसकी आरे से इस साल 12मई को किया गया। एनएसजी ने साल 2008 में भारत को असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच के लिए एक विशेष छूट दी थी। इस क्रम में चीन को भारत-अमेरिका के परमाणु समझौते के आधार पर न चाहते हुए भी भारत का समर्थन करना पड़ा था।

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