अब यह कहना कि सड़कें व चौराहे जाम हो जाते हैं- पुरानी बात लगती है. अब पूरा राज्य ही वाहनों की संख्या और सड़क यातायात की व्यवस्था चरमरा जाने से सभी जगह जाम हो गया है.

जहां राजधानी भोपाल में 16 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं, वहीं राज्य की व्यापारिक राजधानी इन्दौर में 20 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं. राज्य मेें सभी महानगरों से हर रोज बाहर से भी हजारों वाहन आ जाते हैं.

हाल ही में दिल्ली में सुबह के वक्त स्मोग (धुआं और कोहरा का मिश्रण) छा जाने की त्रासदी को कम करने के लिये दिल्ली में बाहर से आने वाले वाहनों को रोकना पड़ा था.

मध्यप्रदेश में सड़कों के किनारे शहरों में खाने की दुकानें, स्टाल व गुमठियों की वजह से आधी सड़कें दब जाती हैं. इनकी वजह से सड़कों पर कुत्तों की भी भारी भरमार है.

कभी किसी जमाने में बीच सड़कों पर मूर्तियां और बड़ी-बड़ी रोटरियां बनाना ठीक रखा होगा. अब सभी बीच सड़क की मूर्तियों को सड़कों के किनारे रखा जाए और रोटरियां भी यातायात के हिसाब से छोटी होनी चाहिये.

मूर्तियों को सड़कों से हटाने को किसी नेता की अवमानना मानकर उन्हें हटाने का विरोध जन विरोधी आंदोलन है. इनको हटाना या सरकाना अवमानना नहीं है.सभी शहरों में अब वाहन चलाने के अलावा पैदल चलना तक दूभर होता जा रहा है. क्या किसी दिन पूरा राज्य हर जगह स्थाई रूप से जाम हो जायेगा?

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