25pic1नई दिल्ली,  संसद के बजट सत्र की शुरुआत में ही दोनों सदनों में हंगामेदार बहस आरंभ हुई. जेएनयू और रोहित वेमुला की खुदकुशी मामले को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष में जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगे और एक दूसरे को नसीहत भी दी गई.

लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार पर शैक्षणिक संस्थाओं को बर्बाद करने और दलितों के वाजिब हक मारने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से देश में असहिष्णुता का माहौल है. विरोधी विचारों को कुचलने और एक खास विचारधारा को थोपने की कोशिश की जा रही है.

जेएनयू मामले पर उन्होंने कहा कि हम देश के खिलाफ नारों की कड़ी आलोचना करते हैं, लेकिन आठ छात्रों के नारों के आधार पर 8000 छात्रों पर कलंक लगाना ठीक नहीं है.उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी स्तर पर देश विरोधी नारों का समर्थन नहीं करती है. लेकिन किसी विचारधारा का विरोध करने वाले छात्रों का दमन स्वीकार नहीं करेगी. सिंधिया ने कहा कि यह सरकार दलितों पर अत्याचार कर रही है. सरकार के हर तंत्र का गलत इस्तेमाल हो रहा है. एक ओर तो ये सरकार डॉ. अंबडेकर के सिद्धातों की बात करती है तो दूसरी तरफ दलितों पर अत्याचार करती है.

सरकार की कथनी और करनी में फर्क है. इनके मंत्री सर्टिफिकेट दे रहे हैं कि छात्र दलित है या नहीं. ये लोग जाति के आधार पर जीवन की कीमत तय कर रहे हैं. क्या यह मूल्य रह गया है एक आदमी के जीवन का. उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संदर्भ में भाजपा नेताओं की ओर से की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए सरकार को घेरने का प्रयास किया.

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