Raghuram Rajanनई दिल्ली. सरकार, इंडस्ट्री, मार्केट और बैंकरों ने एक साथ आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन पर नीतिगत दरें घटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है. सभी ने एक सुर में मांग करनी शुरू कर दी है कि गर्वनर साहब अब तो दरें घटाई जानी चाहिए.

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगढिय़ा ने कहा है कि ब्याज दरों में कटौती का ये सही मौका है. उन्होंने ब्याज दरों में 0.5 फीसदी तक की कटौती की वकालत की है. महंगाई काबू में आ गई है और रघुराम राजन के लिए ब्याज दरों में कटौती का सही मौका है. ग्रोथ बढ़ाने के लिए नीतियां बन रही हैं और इसमें सहयोग देने के लिए आरबीआई दरें घटाएगा तो ही मदद मिलेगी.

वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा का कहना है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कई बार ये बात कहीं है कि दरें घटाने का सही वक्त आ गया है. आरबीआई को इस पर अंतिम फैसला लेना है और इसके लिए उसकी ग्लोबल बाजार पर नजर बनी हुई है.
देश के बड़े बैंकरों को भी लगता है कि दरें घटाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा. क्योंकी महंगाई पूरी तरह से कंट्रोल में है.

अमेरिका फेडरल रिजर्व का दरें नहीं बढ़ाना भारत के लिए अच्छी खबर है. बैंकरों का मानना है कि अब रिजर्व बैंक को दरें घटा देनी चाहिए. हमसे खास बातचीत में एसबीआई की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा कि 29 सितंबर को गवर्नर राजन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. इधर देश के बड़े बैंकरों ने भी मांग की है कि दरें घटाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा. क्योंकी महंगाई पूरी तरह से नियंत्रण में है.

एचडीएफसी बैंक के एमडी आदित्य पुरी का मानना है कि आरबीआई को ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए. आदित्य पुरी ने कहा है कि मौजूदा हालात में रेट कट की गुंजाइश बन रही है.

कॉरपोरेट इंडिया के कई दिग्गज तो 0.5 फीसदी रेट कट की उम्मीद कर रहे हैं. चौथाई फीसदी की कटौती का तो सभी को भरोसा है.
इधर बाजार भी गवर्नर राजन से दरें घटाने की मांग कर रहा है. एडेलवाइज के

चेयरमैन रसेश शाह ने कहा कि इस वक्त मार्केट को ब्याज दरों में कटौती की भारी जरूरत है. हालांकि इंडस्ट्री का मांग भले ही दरों में कटौती की हो लेकिन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन इस बारे में कुछ भी साफ साफ कहने से बचते नजर आए.

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