19as13भोपाल,19 मार्च,नभासं. राजधानी में शासकीय आवासों में रहने वाले कर्मचारियों से भी अब संपत्ति कर वसूल किया जाएगा. कांग्रेस पार्षदों के सुझावों व संशोधनों को दरकिनार करते हुए भारी विरोध के बीच निगम ने संपत्ति कर में संशोधन के इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया.

नगर निगम परिषद के पहले सम्मेलन में परिषद अध्यक्ष सुरजीत सिंह चौहान ने भाजपा पार्षदों के समर्थन के बाद बहुमत मिलते ही इस प्रस्ताव की मंजूरी की घोषणा की. आधा घंटा देरी से आईएसबीटी स्थित परिषद हाल में बैठक शुरु हुई. कभी हंगामे तो कभी शोर-शराबे और हास-परिहास के बीच संपन्न हुई इस बैठक में आपसी परिचय और सुझाव के साथ ही 3 प्रस्ताव रखे गए थे.

भोजनावकाश और उसके बाद लंबे समय तक परिचय का सिलसिला जारी रहा. पहली परिषद में पहले प्रस्ताव के रुप में संपत्ति कर में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया. जिसका कांग्रेस पार्षदों ने इसे कर्मचारी विरोधी बताते हुए विरोध किया वहीं प्रस्ताव में शामिल शैक्षणिक संस्थाओं को छूट देने के मामले पर भी सवाल उठाए.

कांग्रेस पार्षद अमित शर्मा ने शासकीय आवासों में रहने वालों से टेक्स लेने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि शासकीय सेवक को जब संपत्ति का अधिकार ही नहीं हैं तो उनसे किस आधार पर निगम संपत्ति कर वसूलना चाहता है. उन्होंने कहा कि शासकीय आवासीय क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और अग्निशमन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है इसलिए टैक्स लगाया जाना चाहिए, यह तर्क उचित नहीं है.

वहीं कांग्रेस पार्षद अब्दुल शफीक ने शिक्षण संस्थाओं से जुड़े भवन के संपत्ति कर मामले में न्यायालय में पिटीशन खारिज होने को उन्होंने निगम के लॉ सेक्शन की कमजोरी बताया. सीनियर पार्षद मो.सगीर ने भी इस प्रस्ताव से शासकीय आवासों में रहने वालों पर स पत्ति कर का करारोपण न करने की बात कही. जिस पर एमआईसी मे बर महेश मकवाना और अन्य भाजपा पार्षदों द्वारा टोंका-टांकी की गई.

उन्होंने कहा कि यदि सरकारी विभागों से ही निगम संपत्ति कर वसूल ले तो उसे शासकीय आवासों में रहने वाले कर्मचारियों पर टैक्स लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी. उन्होंने इस संबंध में एमपीईबी का उदाहरण दिया. जिस भाजपा सदस्यों ने कहा कांग्रेस पार्षद विषय से भटक रहें हैं.

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