moogyसिंगापुर,  साख निर्धारक एजेंसी मूडीज का कहना है कि सरकारी बैंकों की आय के कमजोर परिदृश्य को देखते हुये यदि सरकार ने उन्हें अतिरिक्त पूँजी उपलब्ध नहीं कराई तो उनका पूँजीकरण प्रोफाइल कमजोर हो सकता है।

एजेंसी की निवेशक सेवा ने देश के सरकारी बैंकों पर हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि बैंकों की पूँजी जरूरत पूरी करने के लिए उन्हें बाहर से पूँजी जुटाने की जरूरत पड़ेगी। मूडीज की उपाध्यक्ष तथा वरिष्ठ विश्लेषक अल्का अन्बरसु ने कहा “अगले एक साल तक बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव रहेगा।

ऐसा विशेषकर इस्पात तथा ऊर्जा क्षेत्र में कुछ बड़े कॉपोरेट समूहों को दिये गये उच्च लिवरेज वाले ऋण की गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में पहचान की प्रक्रिया जारी रहने के कारण होगा। परिणामस्वरूप, इसके लिए किये गये प्रावधान में बढ़ोतरी से मुनाफा कम बना रहेगा और आंतरिक पूँजी सृजन सीमित रहेगा।”

वित्त वर्ष 2015-16 के बैंकों के परिणामों के विश्लेषण के आधार पर मूडीज ने निष्कर्ष निकाला है कि वर्ष 2020 तक उसकी साख निर्धारण सूची में शामिल 11 सरकारी बैकों की पूँजी आवश्यकता 1200 अरब रुपये की होगी जबकि सरकार ने अब तक इन बैंकों को 450 अरब रुपये उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

बैंकों के लिए सार्वजनिक निर्गम के जरिये भी पूँजी जुटाने का विकल्प धूमिल दिख रहा है क्योंकि अधिकतर बैंकों के शेयरों के बाजार भाव उनके बुक वैल्यू से कम हैं।

मूडीज ने बताया कि वह जिन 11 सरकारी बैंकों का साख निर्धारण करता है उनमें आठ ने पिछले वित्त वर्ष में नुकसान उठाया है जबकि शेष तीन के मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

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