27pic2नयी दिल्ली,  कांग्रेस ने असहिष्णुता के मुद्दे पर आज मोदी सरकार पर तीखे हमले करते हुए कहा कि उसकी संविधान में आस्था नहीं है इसीलिए वह इसकी नींव रखने वाले प्रमुख नेताओं को याद न कर अपनी अहिष्णुता का परिचय दे रही है तथा इतिहास को दोबारा लिखना चाहती है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सदन में संविधान के प्रति वचनबद्धता पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि संविधान की नींव रखने और उसके मूल्यों तथा आदर्शों को मूर्त रूप देने वाले कांग्रेस के नेताओं की लंबी फेहरिस्त है इसलिए कांग्रेस की इसके प्रति पुरानी वचनबद्धता है जिसे दोहराने की जरूरत नहीं है ।

उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के पास ऐसा कोई नेता नहीं है जो संविधान निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा रहा हो । इनकी संविधान में आस्था भी नहीं रही। उन्होंने कहा ,“ कुछ लोगों की संविधान में श्रद्धा और आस्था नहीं रही , तिरंगे को नहीं माना , संविधान को नहीं माना ।” लेकिन अब उन्हें इसकी याद आ रही है और वे डा. भीमराव अंबेडकर , सुभाष चन्द्र बोस , पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डा. राजेन्द्र प्रसाद को कांग्रेस से छीनना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि ये सभी नेता देश की संपत्ति हैं इन्हें कोई छीन नहीं सकता।

सदन के नेता अरूण जेटली के भाषण में पंडित नेहरू का जिक्र नहीं किये जाने का हवाला देते हुए श्री आजाद ने सरकार पर असहिष्णुता का माहौल बनाने का आरोप लगाया और कहा कि वह संविधान की बात करती है लेकिन उसकी नींव रखने वाले नेताओं का जिक्र नहीं करती। उन्होंने कहा कि यही असहिष्णुता है जो शीर्ष स्तर से होकर नीचे पहुंचती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि श्री जेटली जर्मनी और उसके तानाशाह हिटलर की तो बात करते हैं लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री के संविधान में योगदान पर बोलते हुए उन्हें शर्म आती है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ साल देश में यही हो रहा है और आज सदन के अंदर भी यही हुआ । यही असिहष्णुता है ।

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