नई दिल्ली,

पिछले दो साल में तस्करी कर लाए गए सिगरेट की जब्ती के मामले दोगुने हुए है. वहीं तस्करी कर लाए हुए और अवैध सिगरेट की वजह से सरकार को सालाना अनुमानित 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशन (एफ एआईएफ ए) ने भारत सरकार से देश में सिगरेट तस्करी के बढ़ते खतरे पर लगाम लगाने और भारतीय एफसीवी तंबाकू किसानों के हितों की रक्षा करने की अपील की। एफएआईएफए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात और अन्य राज्यों में वाणिज्यिक फसलों से जुड़े किसानों और मजदूरों के हित के लिए कार्यरत गैर लाभकारी संगठन है।

महासचिव मुरली बाबू ने कहा, पिछले कुछ समय में तंबाकू पर लगने वाले कर में तेज वृद्धि की वजह से बने ऊंचे टैक्स आर्बिट्रेज के चलते देश में सिगरेट की तस्करी के मामले बढ़े हैं।

तस्करी कर लाए हुए सिगरेट की जब्ती के बढ़ते मामलों से भी यह स्पष्ट है। वित्त मंत्रालय की ओर से दिसंबर, 2017 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, जब्ती के मामले 2014-15 के 1312 की तुलना में 2016-17 में दोगुने से ‘यादा होकर 3108 पर पहुंच गए।

यह जानना महत्वपूर्ण है कि जब्ती के ये मामले किसी पहाड़ की चुटकी भर मिट्टी जैसे ही हैं, क्योंकि बिना किसी निगरानी के दर्जनों कंसाइनमेंट पार हो जाने के बाद जब्ती का कोई एक मामला सामने आता है। भारत में अवैध सिगरेट का कारोबार यहां के कुल सिगरेट उद्योग के 25 प्रतिशत से भी ज्यादा है।

भारत इस अवैध कारोबार के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ रहा बाजार है। इससे सरकार को अनुमानित तौर पर 13,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है और यह सालाना बढ़ रहा है। तंबाकू के अवैध कारोबार को अक्सर संगठित अपराध और आतंकी समूहों का समर्थन होता है।

तस्करी कर लाए हुए सिगरेट की बढ़ती खपत ने भारतीय किसानों पर भी दुष्प्रभाव डाला है, क्योंकि इनमें भारतीय तंबाकू का इस्तेमाल नहीं होता। पिछले 6 साल में घरेलू फ्लू क्योर्ड वर्जीनिया (एफसीवी) तंबाकू की खपत में गिरावट आई है। इससे एफसीवी तंबाकू किसानों की आय में कमी आई है। 2013-14 से अब तक इसमें कुल मिलाकर 3300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आ चुकी है।

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