29 फरवरी को प्रस्तुत केंद्रीय बजट के बाद ही देश का सराफा बाजार हड़ताल पर चल रहा है. इनका विरोध मुखर होने में थोड़ा समय इसलिए लगा कि सरकार, पार्टियों व राजनेताओं का ध्यान भविष्यनिधि निकाय के 60 प्रतिशत भाग पर लगाये टैक्स पर केंद्रित हो गया. 8 मार्च को लोकसभा में वित्तमंत्री श्री अरूण जैटली उसे वापस (रोल बेक) ले लिया. संभावना यह बन रही है कि अब स्वर्ण व हीरक आभूषणों पर लगायी गयी एक प्रतिशत की एक्साइज ड्यूटी पर विरोध
केंद्रित होगा.

इसके अलावा दो लाख से अधिक आभूषण खरीद पर पेन कार्ड के नंबर दर्ज होंगे. इसमें सराफा व्यापार व सरकार दोनों तरफ से कुछ बातें कही जा रही है जो विवेकहीन है. सराफा व्यापारी वर्ग यह भी कह गये कि हम सेल्स टैक्स और इनकम टैक्स देते है. अब उन पर एक्साइज टैक्स न लादा जाए. लेकिन ऐसे व्यापारिक क्षेत्र है जो ये दोनों टैक्स तो देते ही है और उस व्यापार पर एक्साइज टैक्स भी है. इसी तरह सरकार की ओर से भी केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के चेयरमैन श्री नजीर शाह यह कह बैठे कि आभूषण एक ऐसा सेक्टर है जहां रुपयों का हिसाब-किताब नहीं है. यह कालेधन को बढ़ावा दे रहा है. इस सेक्टर को एक्साइज के दायरे में लाना ज्यादा जरूरी है. यदि आभूषण सेक्टर जी.एस.टी. चाहता है तो उसे एक्साइज से छूट मांगना बंद करना होगा. दोनों चीजें एक साथ नहीं दी जा सकती. सवाल यह है कि क्या सरकार ने एक प्रतिशत की एक्साइज ड्यूटी सराफा व्यापार से काला धन निकालने के लिये लगायी है या यह बजट के लिये है. क्या सराफा पर इस ड्यूटी से काला धन निकल आयेगा. श्री शाह की यह बहुत ही बेतुकी
बात है.

जिस काले धन को लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने उसे अपना मेनीफेस्टो ही बना लिया था. श्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में यह दहाड़ते रहे कि पूरा कालाधन पता कर लिया. भारत की पूरी 125 करोड़ की आबादी पर व्यक्ति 15 लाख रुपयों के बराबर है- अगर जीता तो उसे वापस ले आऊंगा. लेकिन बाद में उसे महज जुमला कहकर मुकर रहे है. बजट में वित्तमंत्री श्री जैटली भी यह कहकर कन्नी काट गये कि कालाधन वाले स्वेच्छा से उसका काला घोषित करे अन्यथा सरकार कडऱ्ी कार्यवाही करेगी. सरकार सराफा पर एक प्रतिशत एक्साइज लगाकर कालाधन पर कार्यवाही कर रही है. गंभीर मसले पर शेखचिल्ली जैसे बातें कर गये.

सराफा नेता श्री तरूण गुप्ता ने कहा है कि भारत में एक दिन में सोने की ज्वेलरी की खपत लगभग 3 टन है और इस समय चल रही सराफा हड़ताल से सरकार को 30 हजार करोड़ रुपयों का नुकसान होगा. बजट पूर्व संवादों में भी वित्तमंत्री श्री जैटली ने सराफा व्यापारियों से कोई विचार विमर्श नहीं किया.

अब वित्त मंत्रालय भी बेतुकी बातें छोड़कर कुछ ठीक बोलने लगे है कि 12 करोड़ रुपये से ज्यादा आभूषण बिक्री करने वाले ज्वेलर्स पर ही एक्साइज ड्यूटी लगेगी. देश का आभूषण उद्योग 3.15 लाख करोड़ रुपयों का है और वर्ष 2018 तक यह 5 लाख करोड़ रुपयों का हो जायेगा. छोटे ज्वेलर इसके दायरे में नहीं आयेंगे. एक्साइज अधिकारी उनके परिसरों में नहीं जायेंगे. उनका सीए सर्टीफिकेट मान लिये जायेगा. आभूषणों का जॉब वर्क करने वालों पर यह लागू नहीं होगा. वे जिनके लिये काम करते है वह ड्यूटी चुकायेगा.

आभूषण के क्षेत्र ब्रांड ज्वेलरी के बड़े उद्योग घराने टाइटन के एम.डी. श्री भास्कर भट्टï ने कहा है कि एक्साइड ड्यूटी से ज्वेलरी सेक्टर की दिक्कतें बढ़ गयी है. आभूषणों में असंगठित क्षेत्र भी बहुत व्यापक है- सरकार यह भी बताये कि उनसे कहां और कैसे टैक्स वसूली होगी. इससे लाखों आभूषण कारीगर बेकार हो जायेंगे. सरकार ने भविष्य निधि पर टैक्स वापस ले लिया है. उसे यह एक्साइज ड्यूटी भी वापस ले लेनी चाहिए.

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