surendra_singhभोपाल,  मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुरेंद्र सिंह ने आज यहां राज्य स्तरीय को-ऑपरेटिव फ्रॉड सेमिनार में कहा कि इन प्रकरणों में न्याय दिलाना समाजसेवा का काम है और पुलिस को इनकी विवेचना के लिए सबसे पहले रोडमैप बनाना चाहिए।

तीन दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद इसमें भाग लेने आए जिला बल के निरीक्षक व उप निरीक्षकों को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि इस प्रकार की धोखाधडी में पीड़ित को न्याय दिलाना समाज सेवा का काम है। इन मामलों की विवेचना अन्य प्रकरणों की तुलना में ज्यादा सीधी और साधारण है। जनसुनवाई में आने वाले प्रकरणों में इस धोखाधड़ी से पीड़ितों की संख्या अधिक होती है और यह सीधा आम आदमी के विश्वास से जुड़ा होता है ।

उन्होंने बताया कि को-ऑपरेटिव धोखाधड़ी की सही विवेचना के लिए मामलों में कोई भी विशेषज्ञ नहीं बन सकता, इसलिए इसमें विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा सकती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विशेष पुलिस महानिदेशक बी मारिया कुमार ने कहा कि सेमिनार का आयोजन को-ऑपरेटिव फ्रॉड के मामले में पुलिस को और संवेदनशील बनाने के लिए किया गया है। इस प्रकार की धोखाधड़ी से देश की आर्थिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। नई तकनीकों के आने से अपराधी और भी शातिर हो गए है इसलिए पुलिस को अपनी दक्षता बढ़ाना होगी।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुरुषोतम शर्मा ने बताया कि मार्च 2015 की स्थिति में को-ऑपरेटिव धोखाधड़ी संबंधी 125 प्रकरण लंबित थे, लेकिन पिछले कुछ समय से किए जा रहे प्रयासों के कारण अब तक 50 प्रतिशत प्रकरणों की जांच पूरी की जा चुकी है। सभी प्रकरणों का रोड मैप तैयार कर उनकी विवेचना की जा रही है।

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