प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वाधीनता दिवस पर लाल किले से उद्बोधन में भारत के समुद्रों में समुचित विकास कर देश में समुद्र तटीय विकास की राष्टï्रीय महत्व की योजना की घोषणा की थी. अब केंद्रीय मंत्री मंडल ने अपने निर्णय से उसे विधिवत प्रारंभ कर दिया है.

भारत के उत्तर में हिमालय की पर्वतीय सीमा रेखा है और बाकी तीन ओर भारी भरकम लंबाई की सागर, महासागर व समुद्री खाडिय़ों में हमारी समुद्री सीमाएं है. भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी, दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिम में अरब सागर और मुंबई की खाड़ी जिसकी भौगोलिक स्थिति ने मुम्बई को संसार का सबसे सुरक्षित बंदरगाह और विशाल बंदरगाह का रूप दिया. भारत के समुद्र तटों पर बड़े बंदरगाहों में कोलकाता, विशाखापट्टïम…., चैन्नई, कोचीन और कांदला के नाम आते है. अन्यथा भारत की लगभग पूरी समुद्री सीमा हमेशा से मछुवारों की गरीब बस्तियों के रूप में ही रही. जहां इनके झोपड़ीनुमा मकान होते है और ये स्थानीय स्तर पर भोजन सामग्री की तरह मछली बेचने का काम करते है. इन्हें जाति व आर्थिक स्थिति करे संदर्भ में गरीब पिछड़ा वर्ग माना जाता है.
यह निश्चित ही हमेशा से आश्चर्य का विषय रहा कि इतिहास से लेकर अब वर्तमान तक भारत जिसके पास इतनी बड़ी समुद्री सीमा है कभी भी विश्व नाविक शक्ति व समुद्री व्यापार में बड़ी शक्ति के रूप में नहीं रही. जहां के मछुआरे छोटी-छोटी नावों पर ….. जाल से ही आज तक मछली पकडऩे का काम करते हैं. अब इन दिनों औद्योगिक विकास युग के ट्रावलर भी आ गये हैं. भारत के पाकिस्तान-बंगलादेश व श्रीलंका से हमेशा से एक दूसरे के मछुआरों की धरपकड़ एक सतत् राजनैतिक मुद्दा बनी हुई है.

जबकि विश्व में एक समय छोटी समुद्री सीमा के राष्टï्र पुर्तगाल और स्पेन-कोलम्बस व वास्कोडीगामा के नाम से आज तक समुद्री विकास के इतिहास में दर्ज है. इन्होंने दुनिया के भारत सहित कई देशों को दुनिया के व्यापार व जानकारी में लाया. एक लम्बे समय तक ब्रिटेन दुनिया की सबसे बड़ी नाविक सैन्य शक्ति रहा.

श्री मोदी को यह श्रेय जाता है कि पहली बार उन्होंने भारत के सबसे उपेक्षित समुद्री विकास को सागरमाला की महती योजना विकसित करने का बीड़ा उठाया है. अब मछुआरों की छोटी बस्तियां विकास व निर्माण का नया राष्टï्रीय विकास का रूप देखेगी.

भारत गायों की तरह नदियों का भी देश है लेकिन भारत की गायें और नदियां दोनों ही दीन हीन बनी हुई हैं. हमारी गायों की दूध देने की क्षमता अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है. उनका स्वास्थ्य भी बीमारू है. वैसे हम उनकी पूजा उसी तरह करते हैं जे नदियों की पूजा करते हैं और भारत तेरी गंगा सबसे मैली भी बनाते हैं. नदियों के मामले में खासकर गंगा के मामले में श्री राजीव गांधी सबसे पहले आगे आए. उनकी हत्या हो गयी और गंगा एक्शन प्लान की मृत्यु
हो गयी.

अब श्री नरेन्द्र मोदी ने इसे अपना लक्ष्य बनाया है और इसे संवारने में जुट गये हैं. बात यहीं खत्म नहीं होगी. देश की 101 नदियों को भी भारत के जल परिवहन के रूप में विकसित करने का कार्यक्रम लागू कर दिया गया है.

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