parikarनयी दिल्ली,  सरकार ने आज कहा कि देश के सीमावर्ती इलाकाें में बनी सामरिक महत्व की सड़कों के साथ साथ डिजीटल कनेक्टिवटी बढ़ाने के लिये ऑप्टिक फाइबर केबल (ओएफसी) भी बिछाने और उससे वहां रहने वाले नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बैंकिंग की सुविधा मुहैया कराने पर विचार करेगी।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार सामरिक महत्व की सड़कों के किनारे ओएफसी बिछाने के सुझाव को सरकार ने स्वीकार कर लिया है और इस पर अवश्य विचार करेगी।

रक्षा मंत्री से पूछा गया था कि क्या सरकार चीन की सीमा के किनारे बनने वाली सामरिक महत्व की सड़कों केे किनारे ओएफसी बिछाने और उसके माध्यम से वहां स्थित गांवाें में नागरिकों को बैंकिंग, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध कराने का विचार करेगी।

चीन की सीमा के समीप सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बनायी जा रही सड़कों की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर श्री पर्रिकर ने कहा कि चीन की सीमा पर सामरिक महत्व की कुल 3417.5 किलाेमीटर लंबी सड़कों की 63 परियोजनायें स्वीकृत हुईं हैं जिनमें से 22 पूरी हो चुकीं हैं और 21 में संपर्क बन चुका है, 18 सड़कें अभी नहीं बन पायी हैं, 16 परियाेजनाओं में काम शुरू हो चुका है जबकि दो परियोजनाओं को वन्यजीव अभयारण्य से होकर गुजरने के कारण पर्यावरण स्वीकृति अभी मार्च में ही मिली है जिससे उसका काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि 63 परियोजनाओं की 81 प्रतिशत सड़कों की सरंचना तैयार हो चुकी है और 60 प्रतिशत का समतलीकरण हो गया है।

श्री पर्रिकर ने कहा कि बीअारओ का वित्त पोषण हाल ही रक्षा मंत्रालय के अधीन आया है इसलिये उन्हें अभी स्थिति की समीक्षा करनी है। पर इतना तय है कि किसी भी सामरिक महत्व की परियोजना में धन की कमी नहीं आयेगी। चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में सड़क बनाये जाने अथवा भारतीय क्षेत्र में बनने वाली सड़कों के निर्माण में चीन की ओर से अवरोध डाले जाने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि सीमा पर सड़कें मुख्य सीमा से तीन से पांच किलोमीटर पीछे तक ही बनायी जातीं हैं। इसलिये चीन की ओर से अवरोध का सवाल ही नहीं उठता। अन्य जानकारियों को उन्होंने सुरक्षा कारणाें का हवाला देकर बताने से इन्कार कर दिया।

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