अहमदाबाद,  वर्तमान डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते सायबर अपराधों के विरुद्ध लड़ाई में भारतीय युवाओं को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस नेटवर्क टेक्नोलॉजी ने उठाने का प्रण किया है.

संस्थान 2020 तक न्यूनतम 1 करोड़ और अधिकतम 10 करोड़ भारतीय युवाओं को इसी संदर्भ में विशेष नि:शुल्क कोर्स के जरिये सशस्त बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. ताकि वे इंटरनेट तथा स्मार्ट फोन्स के जरिये तेजी से पैर फैला रहे सायबर क्राइम के खिलाफ लड़ सकें. संस्थान के इस सुदृढ़ कदम से देश में सायबर क्राइम से लोहा लेने वाले प्रोफेशनल्स की कमी के कारण बनी मांग और आपूर्ति की खाई को पाटने में भी मदद मिलेगी.

सायबर अपराधों के षड्यंत्रों के खिलाफ इस युद्ध को राष्टï्रीय स्तर पर लडऩे के लिये एक विशेष कोर्स तैयार किया गया है, जिसे सर्टिफाइड सिक्योर कम्प्यूटर यूजर का नाम दिया है. खास बात यह है कि यह कोर्स पूरी तरह नि:शुल्क होगा. अपनी तरह का यह पहला ऐसा अभियान है जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल भारत के विचार को भी सहयोग करता है और इससे भी आगे यह मेक इन इंडिया की अवधारणा से भी जाकर जुड़ता है.

सीएससीयू कोर्स के अंतर्गत सिक्योरिटी से जुड़े बेसिक फाउंडेशन की शिक्षा देगा, जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम की सुरक्षा, एंटीवायरस का उचित उपयोग, डाटा इंक्रिप्शन, डाटा बैकअप, डिजास्टर रिकवरी, इंटरनेट सिक्योरिटी तथा ऑनलाइन ट्रांजेेक्शन्स व ईमेल कम्युनिकेशन के साथ सोशल नेटवर्किंग साइट्स की सिक्योरिटी से जुड़े बेसिक फीचर्स पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा. इस कोर्स का खाका सोशल इंजीनियरिंग के ईर्द-गिर्द तैयार किया जाएगा जिसमें इंफोर्मेशन सिक्योरिटी, आइडेंटिटी थेफ्ट और लीगल कॉम्प्लाएंस (कानूनी प्रावधानों) का तथा विशेष रूप से मोबाइल सेट की सुरक्षा पर बल दिया जायेगा.

आईएएनटी चेयरमेन और प्रबंध निदेशक आर.एफ. खैरानी के अनुसार संस्था आईटी और इसके अन्य बहुआयामी पहलुओं पर ट्रेनिंग देने का काम करता है. हैकिंग से जुड़े गंभीर खतरों की जानकारी होना आज बहुत आवश्यक है. आज गैजेट्स का उपयोग बढ़ता जा रहा है और युवाओं में सोशल नेटवर्किंग को लेकर ऐसा उत्साह है जो पहले कभी नहीं रहा है. चाहे हम घर में हो, दफ्तर में हो या फिर खेल के मैदान में, इंटरनेट हमारे जीवन में गहरी जड़ें जमा चुका है ।

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