प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 5 मार्च को खंडवा जिले में सिंगाजी ताप विद्युत गृह की दो इकाईयों का उद्घाटन किया गया और इसी प्रोजेक्ट की तीसरी इकाई के लिये भूमिपूजन किया. दोनों इकाईयां प्रत्येक 600-600 मेगावाट उत्पादन करने लगी है और राज्य के विद्युत उत्पादन में दोनों से मिलाकर 1200 मेगावाट बिजली बन रही है. तीसरी इकाई के पूर्ण होने पर उससे 1300 मेगावाट बिजली बनेगी. इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि जब उन्होंने 2003 में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह शासन काल के बाद राज्य की सत्ता सम्हाली थी. उस समय राज्य में 29 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था और बिजली की कटौती होने के दौर से भी जनता परेशान होती गयी थी. उसके बाद से राज्य में विद्युत क्षमता बराबर बढ़ाई गई और स्थिति यह हो गई है कि लोगों को पूरे समय 24 घंटों के लिये बिजली मिल रही है. कटौती बंद हो गयी है और किसानों को भी सिंचाई के लिये 8 घंटे नियमित बिजली प्रदाय की जा रहा है. अब सिंगाजी तार विद्युत गृह में 1200 मेगावाट बिजली बनने से इस समय राज्य में विद्युत उत्पादन 14,280 मेगावाट का हो गया है. सिंगाजी की तीसरी इकाई 2017 में चालू होने के बाद राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 17,000 मेगावाट हो जायेगी. इसके साथ ही राज्य में विद्युत की अन्य परियोजनाएं भी चल रही हैं और 2020 तक राज्य विद्युत क्षमता 20 हजार मेगावाट हो जायेगी. कल ही मुख्यमंत्री श्री चौहान का जन्मदिन था. जन्मदिन पर उपहार मिलते हैं लेकिन श्री चौहान ने अपने जन्मदिन पर सिंगाजी ताप विद्युत गृह के रूप में राज्य को ही अपी तरफ से यह तोहफा दिया है.

इस अवसर पर केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री श्री पियूष गोयल ने यह विशेष उल्लेख किया कि 5 राज्यों को विद्युत क्षेत्र में इन्ट्रीगेटिड डेवलपमेंट योजना के तहत प्रत्येक को 4000 करोड़ की राशि दी गयी थी. इसका पूरा-पूरा उपयोग केवल मध्यप्रदेश में हुआ है.

इस अवसर पर एक बड़ी राष्टï्र बात राष्टï्रीय उपलब्धि के रूप में सामने आयी है कि कोल इंडिया ने देश में कोयला उत्पाद में 7 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है और ताप विद्युत गृहों को कोयला आपूर्ति में 11 प्रतिशत वृद्धि की जा चुकी है. कोल इंडिया ने अपने उत्पादन का लक्ष्य समयबद्ध कार्यक्रम बना लिया है कि वह कुछ ही वर्षों में देश की पूरी कोयला जरूरत के बराबर और इससे भी ज्यादा कोयला उत्पादन कर लेगा और देश कोयला में आत्मनिर्भर हो जायेगा. कोयला में आत्मनिर्भर होने से देश में न सिर्फ ताप विद्युत गृहों बल्कि अन्य उद्योगों को भी ऊर्जा का ोत सुनिश्चित हो जायेगा और देश में विकास में गति आ जायेगी. ऊर्जा विकास की पहली जरूरत है.

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