भारत और यूरोपीय यूनियर्न (ईयू) ने संयुक्त रूप से देश के 5 राज्यों तेलंगाना, आंध्र, कर्नाटक, महाराष्टï्र व उत्तरप्रदेश के 28 केंद्रों पर सिंचाई व सफाई के क्षेत्र में एक नया प्रोजेक्ट ‘वाटर 4 क्राप’ लागू किया है. उससे तो यह लगता है कि इस वैज्ञानिक उपलब्धि में न सिर्फ भारत व यूरोपीय यूनियन के देशों में बल्कि कुछ ही समय में विश्व में सिंचाई-सफाई क्रांंति हो जायेगी. विज्ञान की उपलब्धियों को चमत्कार तो नहीं कहा जाता है क्योंकि वह सबको सब समय उपलब्ध होती है. और लगातार उन्नत होती है.

‘चमत्कार’ केवल धर्म में होते हैं जो कपोल कल्पित कथानक ही होते है जो किसी खास व्यक्ति या घटना एक ही व्यक्ति या समय तक सीमित रखते है. उनका कोई सांसारिक या सामाजिक लाभ नहीं होते केवल बेफिजूल के अंधविश्वास के कथानक के रूप में किसी व्यक्ति या देवता विशेष का महिमा मंडन ही करते है.

विज्ञान में ग्रामोफोन से लेकर आज इंटरनेट, इंटर कान्टीनेन्टल मिसाइल और अंतरिक्ष यान तक चमत्कार ही है लेकिन ये धरातल पर सभी को ज्ञात व सुलभ है.

इस समय सारी दुनिया गंदगी और खाद्य पदार्थों की कमी से चिंतित है. पर्यावरण लगातार बिगड़ता जा रहा है और संसार में जनसंख्या के साथ-साथ गंदगी और भुखमरी बढ़ रही है.

अब न सिर्फ शहरों बल्कि सभी जगहों के नाले गंदे नाले बन चुके है और पीने का पानी भी कम और दूषित होता जा रहा है.

इस भारत-यूरोपीय यूनियन के प्रोजेक्ट में गंदे पानी को स्थानीय स्तर पर ही बायो ट्रीटमेंट (जैविक उपचार) से उपचारित कर खेतों में डाला गया तो परिणाम यह आया कि इससे फसलों का उत्पादन साफ पानी से की जा रही खेती के मुकाबले 14 से 40 गुना ज्यादा बढ़ गया. इससे यह भी लाभ हुआ कि गंदा पानी भी साफ हो गया. खाद्यान्न उत्पादन भी बढ़ गया और यह साफ पानी से ज्यादा उपयोगी है. साफ पानी की सिंचाई में जो भारी खपत होती है वह बच जायेगी. गंदे नाले कृषि ङ्क्षसंचाई के ‘बायो नालेÓ बन जायेंगे. इससे तो भारत के स्वच्छ भारत के साथ ‘स्वच्छ संसारÓ हो जायेगा.

गंदे नालों का पानी सीधा खेतों में लेने से किसान व उपभोक्ता के लिए अहितकारी होता है, पर्यावरण व जल स्रोत भी गंदे होते हैं और हर जगह सीवेज ट्रीटमेंट प्लान लगाना व संचालित करना बड़ा महंगा और तकनीकी काम होता है. लेकिन गंदे नालों को इस जैविक उपचार विधि से स्थानीय स्तर पर भी जैविक नाला बनाया जा सकता है. उससे गंदे नालों का पानी जैविक रूप में पुन: प्रयोग में आकर संसार में अभी तक बोरलोग द्वारा रासायनिक खादों से किये जा चुके हैं ‘ग्रीन

रिवोल्यूशनÓ की जगह जैविक पानी के जैविक नाले संसार में ‘ग्रीन इकोनोमीÓ लाने जा रहे हैं. अब जमाना रासायनिक खादों-औषधियों से त्रस्त होकर जैविक (बायो) युग में आ रहा है और भारत-ई.यू. ‘वाटर 4 क्रापÓ इस दिशा में एक बड़ी क्रांति है. स्वच्छ संसार, स्वच्छ भरपूर पानी और अधिक उत्पादन की ओर एक बड़ा
कदम है.

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