knwखंडवा, 4 सितंबर. सनावद से खंडवा के बीच बड़ी रेल लाईन आकार लेने लगी है. सर्वे का काम पूरा होने वाला है. कलेक्टर्स के पास रेलवे लगभग 90 करोड़ जमा करने वाला है. भू-अर्जन की कार्रवाई होने के बाद 2017 तक 52 किमी खंडवा-सनावद तक पटरियाँ बिछ जाएंगी. खंडवा से मऊ छोटी लाईन की रेल भी उज्जैन सिंहस्थ के बाद बंद हो सकती है. सनावद से मऊ के बीच घाटों के कारण दिक्कत जा रही है. इसके उपाय खोजे जा रहे हैं. रेलवे ने खंडवा से सनावद के ट्रेक के लिए विभागों को 250 करोड़ रुपए बांटने शुरू कर दिए हैं. खंडवा व खरगोन कलेक्टरों को जल्द भू अर्जन की राशी मिलने वाली है.

डेढ़ से दो घंटे में खंडवा से इंदौर का सपना 2017 में पूरा होने वाला है. खंडवा से सनावद के बीच सर्वे का 30 प्रतिशत काम ही बाकी है. राजस्व विभाग के अमले के साथ रतलाम डिवीजन के आईओडब्लू मृत्युंजय ठाकुर को जल्द यह काम पूरा करने के निर्देश रेल मंत्रालय ने दिए हैं. भू-अर्जन की कार्रवाई खंडवा व खरगोन कलेक्टर फूर्ती से करने वाले हैं. इन्हें बजट का इंतजार है. चार धाराओं के बाद किसानों को मुआवजा बंटेगा. इसके बाद अत्याधुनिक तरीके से पटरी बिछाने के लिए हाईटेक मशीनें साल भर में 52 किमी पटरी बिछा देंगी. मतलब समय सीमा से पहले ही इस योजना को अंजाम दिया जाएगा. रेलवे इसके लिए ढाई सौ करोड़ रुपए हाथ में लेकर बैठा है. दिक्कत केवल बड़वाह से मऊ व कालाकुंड की आ रही है. घाटियों के चक्कर में कुछ वक्त ज्यादा लग सकता है.

इंदौर से खंडवा अभी तक हाई-वे से जुड़ा है. चार घंटे में यह दूरी स्काय बस से तय होती है. छोटी लाईन की छुक-छुक गाड़ी पांच से साढ़े पांच घंटे लगाती थी. ब्राडगेज होने के बाद सीधे डेढ़ से पौने दो घंटे में खंडवा का मुसाफिर इंदौर में दिखेगा. जबकि हवाई दूरी भी 40 मिनट से कम में तय नहीं की जा सकती. मतलब खंडवा से इंदौर के बीच आने वाले शहरों व गांवों को विकास के पंख लगने वाले हैं. व्यापारी व हर वर्ग अपने काम अप-डाऊन कर निपटाएगा. छात्र भी इंदौर में बिना रहे डिग्री व कोर्स पूरा कर सकेंगे.

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