उज्जैन कुंभ में न सिर्फ ठीक-ठाक बल्कि बहुत अच्छा संचालन इंतजाम चल रहा था. इस साल तेज गर्मी व कुछ जल्दी और बहुत अच्छी बरसात के अनुमान आ चुके थे. उसी प्रक्रिया में मानसून पूर्व के ‘प्री-मानसून’ कही जाने वाली वर्षा और तेज आंधी भी प्राकृतिक क्रियायें हैं, पर उज्जैन कुंभ मेले को अस्त-व्यस्त कर गई. इसके लिये तो निश्चित ही राज्य शासन या जिला प्रशासन को दोषी करार नहीं दिया जा सकता है. प्री-मानसून वर्षा भी एक झल्ले व हल्ले की होती है और हवायें भी तूफान नहीं आंधी या तेज हवाएं ही कहलाती हैं.

कुंभ में भी हवाओं की रफ्तार महज 40 किलोमीटर प्रति घंटा थी. लेकिन कपड़े के पंडाल और टीनों के शेड गिरा देने के लिए काफी थी और वही उज्जैन में हुआ. 45 मिनिट की एक इंच वर्षा ने ही लगभग 200 पंडाल गिरा दिये और 100 को जख्मी कर दिया. इस जरा सी वर्षा और आंधी ने करोड़ों रुपयों से जमा-जमाया इंतजाम बिगाड़ दिया. पानी बहा तो नहीं, लेकिन पूरे कुंभ क्षेत्र में कीचड़ मचा दिया. मंजर यह था ऊपर से पानी, बीच में तेज हवा और नीचे कीचड़ था. इसी से लोगों को क्या परेशानी हुई होगी उसका अंदाजा सहज में लग जाता है.

पंडाल और आशियाने हवा में उड़ गये और कुंभ में श्रद्धा भाव के क्षिप्रा स्नान के साथ प्रकृति ने जबरिया वर्षा स्नान भी करा दिया. यही कहकर संतोष किया जा सकता है कि जैसी ईश्वर की लीला.

इस बात में तो कोई तुक नहीं है कि मौसम विभाग ने काफी दिन पहले ही आंधी और वर्षा की चेतावनी दी थी और राज्य शासन व जिला प्रशासन ने कुछ नहीं किया. इसमें शासन व प्रशासन के करने का क्या था- क्या वह वर्षा रोक देते या आंधी की स्पीड कम कर देते या आपातकाल की आशंका में चलते जा रहे कुंभ को रद्द कर लोगों से फौरन उज्जैन छोडऩे को कहते. प्राकृतिक आपदा को उसी रूप में लिया जाना चाहिए. हर बात में शासन-प्रशासन पर इल्जाम थोपना अपने आप में गैर-जिम्मेवाराना हरकत है.

लेकिन इस आपदा की आंधी में शासन व प्रशासन के दावों को हवा-पानी में उड़ा, बहा दिया और यह साबित कर दिया कि सिंहस्थ के कामों व खर्चों में भारी भ्रष्टïाचार हुआ है. कुछ दिन पूर्व ही एक नई बनाई सड़क में बड़ा गहरा गड्ढïा हो गया- जिसने यह बता दिया कि सड़कें कैसी बनायी गई हैं. यह तो प्री-मानसून से पहले हुआ.

दूसरी ओर ढोल पीटकर दावा किया गया कि क्षिप्रा को इतना साफ व जलधारा से भर दिया है कि वह नर्मदा के समान पावन हो गई. लेकिन सामने आ गया कि जरा सी 40 मिनिट की एक इंच बरसात में क्षिप्रा में सबसे प्रमुख स्थान रामघाट क्षेत्र हरसिद्धि पाल के पास ड्रेनेज का उफना पानी मिल गया, कई उफने नाले उसमें जा मिले. दाती गेट, रामानुज कोट, रुद्रसागर के नाले, गंदे ड्रेनेज क्षिप्रा में जा मिले और पूरी पावन नदी को गंदा नाला और गंदगी से भर गयी. इसने यह साबित कर दिया कि क्षिप्रा सफाई के नाम पर जो करोड़ों रुपये का खर्च दिखाया गया है वह पूरा का पूरा भ्रष्टïाचार में हड़प लिया गया और नदी पर कोई काम नहीं हुआ. अब इसमें किसी जांच-पड़ताल की जरूरत ही नहीं रह गयी. उस पूरी रकम की जिम्मेवार अफसरों से वसूली की जाए और उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए.

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