cottonमुंबई,  बीते वर्ष दुनिया के कपास भंडार में आठ प्रतिशत तक की गिरावट आई है और यह 2.04 करोड़ टन रहा है। 2015-16 (जुलाई-जून) में यह विश्व के उपभोग का लगभग 86 प्रतिशत भाग है। 2009-10 के बाद से दुनिया के कपास भंडार में यह कमी पहली बार हुई है।

अंतरराष्टï्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) ने आज जारी अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। कम उपज और मांग द्वारा प्रोत्साहन न मिलने की वजह से सीजन के अंत में भंडार में इस गिरावट का अनुमान जताया गया है। कपास की मांग में भी गिरावट आ रही है। मांग में इस गिरावट के पीछे आईसीएसी ने दो कारणों की ओर इंगित किया है। इनमें से एक इसके विकल्प यानी पॉलिएस्टर की कीमतों में कमी है जो कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के बाद महत्त्वपूर्ण ढंग से कम हुई हैं। कपास के सबसे बड़े उपभोक्ता चीन समेत कई देश इस मानव-निर्मित रेशे का प्रयोग करने लगे हैं। पीएसएफ-पॉलिएस्टर स्टैपल फाइबर की औसत मासिक कीमत में पिछले दो सालों में एक-तिहाई तक की गिरावट आई है। भारत के कपास उत्पादन में सात प्रतिशत की कमी आई है और यह 60 लाख टन से नीचे आ गया है। दूसरी ओर, कपास के लिए चीन की मांग भी गिरी है और कपास के अन्य उत्पादक देशों में भी यही प्रवृत्ति दिखी है।

वहीं, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के कपास के वैश्विक उपभोग में भी बदलाव आया है। इन देशों में कपास उपभोग में तेजी देखी गई है। आईसीएसी के अनुसार चीन के भंडार में सात प्रतिशत यानी 1.2 करोड़ टन की गिरावट का पूर्वानुमान जताया गया है। हालांकि बाकी दुनिया के शेष भंडार में नौ प्रतिशत यानी 84 लाख टन कमी की संभावना है। भंडार में यह कमी दुनिया के उत्पादन में 15 प्रतिशत की गिरावट की वजह से है जिसका 2.22 करोड़ टन रहने का अनुमान है। उपभोग में इजाफा न होना भी इसकी एक वजह है।

दुनिया के कपास उपभोग में दो प्रतिशत यानी 2.39 करोड़ टन की गिरावट की संभावना जताई जा रही है। सबसे बड़े कपास उपभोक्ता चीन में 2009-10 के बाद से इसका उपभोग लगातार गिरा है। 2015-16 में चीन का कपास उपभोग पिछले सीजन से पांच प्रतिशत कम या 71 लाख टन रहने का पूर्वानुमान जताया गया है।

Related Posts: