खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना आदेश
  • नई गाइडलाइंस के लिए इंटर मिनिस्ट्रियल कमिटी का होगा गठन
  • केन्द्र सरकार ने फैसला बदलने को कहा था

नई दिल्ली,

अपने ही आदेश को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में फिल्म दिखाए जाने से पहले राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख बदलने के बाद माना जा रहा था कि कोर्ट भी अपना फैसला पलट सकता है.

केंद्र सरकार ने सोमवार को कोर्ट से कहा था कि अदालत को अपने आदेश में बदलाव करना चाहिए. केंद्र ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि इस मुद्दे पर इंटर मिनिस्ट्रियल कमिटी का गठन किया गया है ताकि वह नई गाइडलाइंस तैयार कर सके.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार के हलफनामे को स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने संबंधी अंतिम फैसला केंद्र द्वारा गठित कमिटी लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि कमिटी को सभी आयामों पर व्यापक रूप से विचार करना चाहिए.

इस फैसले के बाद फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना या न बजाना सिनेमाघरों के मालिकों की मर्जी पर निर्भर होगा. कोर्ट ने कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने से दिव्यांगों को छूट मिलती रहेगी.

कावेरी पर 4 हफ्ते में फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह 2 दशकों से भी ज्यादा समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद के मसले पर एक महीने के भीतर फैसला देगा. जल बंटवारे को लेकर यह विवाद तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच है.

इस मामले में पिछले दो दशकों में काफी भ्रम पैदा किया गया है. अदालत ने साफ कहा है कि चार महीने में फैसला दिए जाने के बाद ही कोई फोरम कावेरी बेसिन से जुड़े इस मामले को उठाएगा.

फांसी पर केंद्र से सवाल

मौत की सज़ा के लिए फांसी के अलावा दूसरे विकल्पों के इस्तेमाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 4 हफ्तों के भीतर अपना जवाब दखिल करने को कहा है.सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि दूसरे देशों में मौत की सजा कैसे दी जा रही है? कोर्ट ने इस मामले में जवाब देने के लिए सरकार को चार हफ्ते का वक्त दिया है.

इससे पहले 6 अक्टूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा के लिए दूसरे विकल्पों के इस्तेमाल संबंधी याचिका दायर की गई थी.इस याचिका में कोर्ट से सज़ा-ए-मौत के लिए फांसी की जगह दूसरे तरीकों के इस्तेमाल की मांग की अपील की गई थी जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था. याचिका में सजा-ए-मौत के लिए फांसी के तरीके को क्रूर और अमानवीय बताया था.

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