अहमदाबाद. पश्चिम एशिया विशेष रूप से सीरिया का संकट भारतीय जीरा निर्यातकों के लिए वरदान बन गया है। इस जिंस का निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में 50,000 टन के स्तर से बढ़कर वित्त वर्ष 2014-15 में 1.5 लाख टन हो गया है। सीरिया जीरा निर्यात के मामले में भारत का कड़ा प्रतिद्वंद्वी है और यह उत्पादन और पश्चिमी एशियाई देशों को निर्यात में पिछड़ रहा है, जिससे भारतीय जीरा निर्यातकों के पास आने वाले ऑर्डर बढ़े हैं।

भारत में ज्यादातर जीरा निर्यातक गुजरात के हैं। हालांकि मसाला बोर्ड के चेयरमैन ए जयतिलक और वाइस चेयरमैन भास्कर शाह का कहना है कि गुणवत्ता से संबंधित बाधाओं के चलते निकट भविष्य में रुझान उलट सकता है। जयतिलक ने कहा, च्अच्छे मौसम और पश्चिम एशिया में संकट के कारण जीरे के निर्यात में तेजी आई है। अगर भारतीय जीरा निर्यातक अपनी गुणवत्ता सुधार लें तो यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है। इस समय गुणवत्ता का मसला इस मसाले के अनवरत निर्यात में सबसे बड़ी बाधा है। जीरे का ज्यादातर निर्यात गुजरात से होता है।ज् इस समय निर्यात होने वाले जीरे में 30 फीसदी मिलावटी पाया जाता है, जबकि सीरिया 100 फीसदी गुणïवत्ता वाले मसालों का निर्यात करता है।

चालू वित्त वर्ष 2015-16 के शुरुआती संकेत पहले ही जीरे के निर्यात में गिरावट दर्शा रहे हैं। वित्त वर्ष 2014-15 के पहली तिमाही में जीरे का निर्यात 49,000 टन रहा था, लेकिन वित्त वर्ष की आलोच्य तिमाही में घटकर 27,000 टन रहा है। गुजरात में गुणवत्ता की समस्या हल करने के लिए मसाला बोर्ड राज्य में पहली बार मसाला परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने जा रहा है। इस प्रयोगशाला पर मसाला बोर्ड करीब 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा और यह देश की ऐसी सातवीं प्रयोगशाला होगी।

जयतिलक ने कहा, यह प्रयोगशाला दिसंबर तक कांडला बंदरगाह पर स्थापित होगी। यह गुणवत्ता की जांच करेगी और निर्यात योग्य मसालों को ही मंजूरी देगी विशेष रूप से सीड मसालों को, जिनके लिए गुजरात जाना जाता है।
जयतिलक ने कहा कि भारत के मसाला निर्यात में बढ़ती गुणवत्ता का संकेत यह है कि अब रद्द होने वाली खेप में कमी आ रही है। उन्होंने कहा, च्वर्ष 2011 में यूरोप में 180 खेप रद्द हुई थीं, जबकि कैलेंडर वर्ष 2014 में केवल 16 खेप ही रद्द हुई हैं। यूरोप हमें नियमित रूप से आंकड़े भेजता है।ज् जयतिलक ने कहा कि पहली तिमाही के आंकड़ों के आधार पर मसालों का निर्यात 25 से 30 फीसदी की अच्छी दर से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2015-16 की पहली तिमाही के दौरान भारत से 3,980 करोड़ रुपये के मसालों का निर्यात हुआ, जो 2014-15 की इसी अवधि के निर्यात 3,059.74 करोड़ रुपये से 30 फीसदी अधिक है।

मात्रा के लिहाज से निर्यात वित्त वर्ष 2015 की पहली तिमाही में 2,13,443 टन के स्तर से बढ़कर वित्त वर्ष 2016 की पहली तिमाही में 2,15,215 टन हो गया।मसाला बोर्ड के मुताबिक भारत के कुल मसाला निर्यात में मिर्च, लहसुन, कालीमिर्च, छोची इलायची, मेेथी, जायफल, सौंफ और मसाला तेलों का अहम योगदान होता है। जयतिलक ने कहा, च्पिछले पांच वर्षों के दौरान मसालों के निर्यात में 20 फीसदी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर रही है।

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