प्रभु की कृपा रही कि रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 16-17 के लिये बहुत ही सुखद रेल बजट लोकसभा में पेश किया. इसमें रेलयात्री किराया और मालभाड़े में कोई वृद्धि नहीं की गयी है. लेकिन अब यह एक तरीका हो गया है कि बजट में कुछ न बढ़ाओ और पहले या बाद में ‘एक्जीक्यूटिव आर्डरÓ से इनमें वृद्धि करो. श्री प्रभु ने कहा कि रेलवे के लिये आमदनी के साधन ढूंढने होंगे. उनमें किराया-भाड़ा वृद्धि भी हो सकती है.

मध्यप्रदेश को एक सांकेतिक सौगात मिली है कि राजधानी का हबीबगंज स्टेशन ‘मॉडलÓ रूप में विकसित किया जायेगा.

चार नयी रेल सेवाएं- ‘हम सफरÓ, ‘तेजस…Ó ‘उदयÓ और ‘अन्तोदयÓ शुरू की गयी है. ये सभी लंबी दूरी की सुपर फास्ट ऐसी ट्रेनें होंगी जो पूरी की पूरी ‘जनरलÓ होगी. यह ‘आम आदमीÓ की रेलें होंगी. लेकिन इन्हें ‘आम आदमीÓ तक बनाये रखने के लिये रेलवे को रक्षा-सुरक्षा के अथक प्रयास निरन्तर बनाये रखना होंगे. इनमें आरक्षण न होने की वजह रेलवे में टिकिट व सीट कब्जा करने वाले इन्हें अपना नियमित धंधा उसी तरह बना लेंगे जैसे अभी वे रेलवे टिकिट काउंटर के ‘क्यूÓ पर कब्जा कर लेते है और उसमें जगह देने व टिकिट ब्लेक करने का धंंधा करते है. इन ट्रेनों में ऐसा ‘गेट क्रेशÓ किया जायेगा कि आम आदमी चढ़ भी नहीं पायेगा. ये ट्रेनें आम आदमी को आमतौर पर उपलब्ध रहे इसके लिये व्यवस्था तो ‘खासÓ करनी पड़ेगी.

भारत में लगभग 50 प्रतिशत यात्रा धार्मिक रूप की होती है. इसमें ‘आस्थाÓ ट्रेनों का सर्किट मुख्य 18 तीर्थ स्थानों को जोड़ेगा. अन्तोदय एक्सप्रेस जनरल होगी. मध्यम वर्ग के लिए हमसफर थर्ड एसी और तेजस… सुपरफास्ट होगी.
रेलवे में खाने की व्यवस्था अभी भी ‘कभी यह कभी वहÓ प्रयोग होने जा रहे हैं. एक समय रेलवे में ‘ब्रेन्डनÓ कम्पनी प्लेटफार्म पर रेस्ट्रा व पेन्ट्री कार चलाती थी. बाद में इस जगह पर अलग-अलग ठेकेदारी की व्यवस्था की गई. बाद में प्लेटफार्म व ट्रेनों में रेलवे केटरिंग शुरू की गयी. ये सभी सरकारी उपक्रमों की तरह भारी घाटे में चले और रेलवे ने इन्हें ‘प्राइवेटÓ कर दिया. इससे भी यात्री त्रस्त ही बने हुए हैं. यह पकड़ में भी आ गया कि इनमें सड़ी-गली सब्जियां और घटिया आटा व चावल का ही उपयोग होता है. इसलिये इस रेलवे बजट में सुरेश प्रभु ने कृपा कर इसे फिर से आई.आर.सी.टी.सी. (इंडियन रेलवे केटरिंग-टूरिज्म कारपोरेशन) को पुन: सौंपने की घोषणा की. यह रेलवे की कम्पनी है. रेलवे में खाने पीने का धंधा मोनोपोली होता है. इस धंधे में भारी कमाई है. यह स्थापित होता है कि खाने पीने के धंधे में 60 प्रतिशत का मुनाफा होता है. रेलवे ने इसे अब फिर अपने हाथ में ले लिया. श्री प्रभु को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि रेलवे इस धंधे में इतना कमाये कि वह उसके बजट में आमदनी का एक उसी तरह मुख्य स्रोत बने जैसे रेलवे किराया भाड़े से प्राप्त करती है.

रेलवे बजट में एक बड़ी भारी कमी यह रही कि इससे यात्री सुरक्षा पर कुछ भी नहीं कहा गया. रेलवे में चोरी-डकैती, हमला, हत्या दिनोंदिन बढ़ रहा है. मध्यप्रदेश में एक लड़की को लुटेरों ने गाड़ी से नीचे फेंक दिया, मध्यप्रदेश के मंत्री श्री मलैया और उनकी पत्नी को ट्रेन में लुटेरों ने हथियार दिखाकर लूट लिया. ट्रेनों में चोरी कराने के लिये अपराधियों की नियोजित गैंग है. रेलवे की पृथक पुलिस जीआरपी होती है. ट्रेनों में सश पुलिस भी तैनात की गयी है. फिर भी संगीन अपराध बढ़ते जा रहे हैं. किन्नर-हिजड़ों का मुसाफिरों पर इतना आतंक बढ़ गया कि रेलवे बोर्ड को सरकुलर निकालकर उनके खिलाफ कार्यवाही का निर्देश देना पड़ा. लेकिन यह निर्देश केवल कागजी सिद्ध हो रहा है और हिजड़ा आतंक बराबर बना हुआ है. हिजड़े यात्रियों से 500-1000 की मांग करते हैं. इसी बात पर उज्जैन के एक व्यापारी की ट्रेन में हिजड़े ने छुरा मार हत्या कर दी.

राजस्थान और अभी हरियाणा में जाटों के आरक्षण में रेलों की सम्पत्ति का भारी नुकसान किया गया. हजारों ट्रेनों का परिचालन रोक दिया. पूरा राष्टï्र त्रस्त हो गया. इसके विरुद्ध श्री प्रभु कुछ नहीं बोले- कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई. इन दिनों रेलयात्री प्रभु के भरोसे ही यात्रा करते हैं.