antonyनयी दिल्ली,  पूर्व रक्षा मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए के एंटनी ने राफेल सौदे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा जरूरतों और महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ को ताक पर रख कर यह सौदा किया है ।

श्री एंटनी ने कहा कि वायुसेना की तत्काल जरूरतों को देखते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(संप्रग) सरकार ने 126 राफेल विमान खरीदने का फैसला किया था । उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए खुद वायुसेना मानती है कि अपनी न्यूनतम परिचालन क्षमता के लिए इतने विमानों की दरकार है लेकिन मोदी सरकार ने केवल 36 विमान खरीदने का सौदा किया है,क्या यह पर्याप्त है? उन्होंने कहा कि वायुसेना के विमानों की संख्या लगातार घट रही है।

इस रफ्तार से 2022 तक वायु सेना के विमानों के स्कवाड्रन की संख्या घटकर केवल 25 रह जाएगी जबकि स्क्वाड्रनों की स्वीकृत संख्या 42 है। दूसरी ओर सुरक्षा परिदृश्य लगातार और जटिल तथा उथल-पुथल भरा होता जा रहा है। ऐसे में वायुसेना को और शक्तिशाली बनाने की दरकार है। उन्होंने सवाल किया कि विमानों की कमी को दूर करने की सरकार के पास आखिर याेजना क्या है? श्री एंटनी ने कहा कि सरकार ने खरीदे जाने वाले विमानों की संख्या ही नहीं घटाई है बल्कि इस सौदे की कई शर्तों को भी बदल दिया अौर इस क्रम में खुद अपनी महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया योजना को भी ताक पर रख दिया है।

संप्रग सरकार ने तय किया था कि शुरुआती चरण में 18 राफेल विमान फ्रांस से सीधे खरीदे जाएंगे और आठ भारत में एसेंबल किये जांएगे लेकिन अब मोदी सरकार ने जिस सौदे पर हामी भरी है, उसमें सभी 36 राफेल विमान तैयार हालत में फ्रांस से सीधे भारत आएंगे और कोई विमान देश में एसेंबल नहीं किया जाएगा। यह मेक इन इंडिया कार्यक्रम को ताक पर रखने जैसा है। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के सौदे पर कल हस्ताक्षर किया है। यह सौदा 59000 करोड़ रूपये में हुआ है ।

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