UNAसंयुक्त राष्ट्र,  भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे और कामकाज के तौर तरीके पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि 15 सदस्य देशों की यह ताकतवर संस्था जमीनी हकीकतों से मुंह मोड़ चुकी है और बीते समय की नुमाइंदगी करता है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि आतंकवाद अब भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के रास्ते में एक मूल खतरा है और आतंकवाद से लडऩे के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की कोशिशों में काफी कुछ वांछित है.

उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि सूचीबद्ध व्यक्तियों एवं संगठनों को प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन करने पर भी दंडात्मक कार्रवाई तो दूर, कड़ी फटकार भी नहीं लगती. उन्होंने कहा कि लेकिन हमसे ,संयुक्त राष्ट्र के आम सदस्यों से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समितियों के फैसलों का अनुपाल करने की आशा की जाती है.

किसी आतंकवादी या आतंकवादी संगठन पर सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध को लेकर सहमति की जरूरत के बारे में सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों की वीटो की ताकत और उसके इस्तेमाल के चलन ने कई बार अल-कायदा प्रतिबंध समिति को किसी एक सदस्य देश या दूसरे सदस्य की मनमर्जी पर निर्भर रहना पड़ता है. इसकी सफाई की भी कोई जरूरत नहीं होती, बस आपत्ति, होल्ड या ब्लॉक जैसे शब्दों के इस्तेमाल की जरूरत भर रहती है और फिर घृणित कार्य करने वाले लोगों के खिलाफ बड़ी मेहनत से लाए गए प्रस्ताव की हत्या हो जाती है.

26 नवंबर के मास्टरमाइंड जकी-उर-रहमान से जुड़े भारत के एक प्रस्ताव को चीन ने पिछले साल इसी वीटों पावर के जरिए रोक दिया था.
सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, यह बड़ी विडंबना है कि सुरक्षा परिषद का अपना घर तो व्यवस्थित है नहीं जबकि वह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोकतंत्र एवं कानून के शासन की स्थापना की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा, सुरक्षा परिषद का वर्तमान स्वरूप और उसकी कार्यप्रणाली हकीकत से दूर है तथा गुजरे हुए समय का प्रतिनिधित्व करती है.

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की वैधता पुन: हासिल करने के लिए उसमें सुधार के सिवा कोई विकल्प नहीं है. अकबरुद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण तत्व के रूप में संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का सम्मान एवं उद्देश्य विषय पर खुली बहस के दौरान ये तीखी टिप्पणियां कीं.

उन्होंने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि उसे यह मौलिक बदलाव करने के लिए किसी प्रलयकारी संकट की जरूरत नहीं होगी. सुधार की कभी इतनी बड़ी जरूरत नहीं है जो परिषद की इष्टतम कार्यकुशलता के लिए अनिवार्य हो और यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति असली श्रद्धांजलि होगी.

भारतीय दूत ने कहा कि परिषद ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश में चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के दृष्टांत में अगुवाई की है लेकिन उसके अपने कार्य हमेशा चार्टर की भावना के अनुरूप नहीं रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य होते हैं जिनमें पांच स्थाई हैं तथा बाकी 10 अस्थायी सदस्य हैं जिनका निर्वाचन महासभा द्वारा साल के लिए किया जाता है. पांच सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं.

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