भोपाल, प्रदेश के एकमात्र हिन्दी विश्वविद्यालय अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय में यूं तो 800 पाठयक्रम संचालित होते है पर विश्वविद्यालय में मूलभुत सुविधाओं का भारी अभाव से जूझ रहा है इसका सीधा असर बच्चो की शिक्षा पर पड़ रहा है लिहाजा इसके कारण यहां प्रवेश लेने के लिए कोई रूची नहीं ले रहा है.

जबकि यहां कई पाठयक्रम ऐसे है जो कि किसी दूसरे विश्वविद्यालय में अभी तक शुरू नहीं हुए है न ही विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण कम्प्यूटर लैब है, न ही पठन पाठन के लिए पुस्तकालय में पर्याप्त पुस्तके, यूनिवर्सिटी का नया केम्पस पिछले 4 वर्षो से ग्राम मुगालिया कोट में 50 एकड़ में बन रहा है.

विश्वविद्यालय में पत्रकारिकता, मेड़ीकल एवं इंजिनियरिंग के विद्यार्थीयों के लिए न ही पर्याप्त संसाधन है, न ही प्रेक्टिकल की व्यवस्था यूनिवर्सिटी का उद्देश्य मातृभाषा हिन्दी में छात्रों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करना था , पर बज़ट की कमी के कारण यहां सिर्फ कागजों में ही कोर्सेस संचालित है जमीनी स्तर पर इंजिनियरिंग व मेड़ीकल में छात्रों का एडमीशन न के बराबर होना दिखता हैं.

यहां देश में एकमात्र संस्थान है, जहां जैवविवधता का कोर्स हिन्दी में संचालित होता है, यहां योग व मत्स्य विभाग भी है , गर्भ तपोवन केन्द्र की भी स्थापना की गई है, जो कि चार माह से अधिक समय की गर्भवती स्त्रीयों को प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करवाती हैं.

विश्वविद्यालय में सुविधाओं के अभाव पर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है, कि हमारा नया परिसर कुछ वर्षो में तैयार हो जाएगा, जहां पत्रकारिकता, अभियांत्रिकी व मेड़ीकल के विद्यार्थीयों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो जायेगे.

टेबल कुर्सियों से अधिक कोर्स

हिन्दी विश्वविद्यालय में मूलभुत सुविधाओं का भारी अभाव हैं यहां योग, मत्स्य, ज्योतिष संस्कृत, हिन्दी शीघ्रलेखन सहित ऐसे कोर्सेस संचालित होते है जिससे छात्र अपनी मातृभाषा हिन्दी में ही शिक्षा प्राप्त करे पर विश्वविद्यालय अपने उद्देश्यों में विफल नजर आ रहा है.

यहां एक महीने का डिप्लोमा व छात्रों की स्किल डेवलप हो इसके लिए भी थ्रीडी एनिमेशन, बेंब डिजाइनिंग व इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के कोर्स कागजों में ही संचालित हो रहे है. यहां योग, ज्योतिष संस्कृत व मत्स्य विभाग भी है जहां छात्रों को भारतीय प्राचीन ज्ञान का आधुनिकरण कर सिखाया जाता हैं, पर विश्वविद्यालय बज़ट की कमी के कारण अपने उद्देश्यों को पूर्ण करने विफल हो रही है.

संसाधनों की कमी

यूनिवर्सिटी में केन्टीन के नाम पर चाय की टपरी नुमा एक गुमटी है जहां सिर्फ चाय ही मिलती है, बच्चे कुछ खाने के लिए 2 किमी दूर जहांगीराबाद जाते है, विश्वविद्यालय में अनुवाद विभाग है जहां विश्व की दूसरी भाषाओं की किताबो का अनुवाद हिन्दी में कर अभियांत्रिकी व अन्य विषयों के छात्रों को पाठय सामग्री उपलब्ध करायी जाती है, पर प्रत्येक विषय में किताबो की कमी इस काम को कठिन बनाती है.

विश्वविद्यालय का नया परिसर 4 वर्षो से ग्राम मुगालिया कोट में निर्माणाधीन हैं, इसीलिए पुरानी विघानसभा परिसर में विश्वविद्यालय संचालित होता हैं पर लीज खत्म होने व पुरानी विघानसभा भवन को हेरीटेच होटल बनवाने के कारण अब यह परिसर बेनज़ीर कॉलेज के पुराने परिसर में शिफ्ट होगा, छात्रों का कहना हैं कि हमें हमेशा जर्जर व पुराने भवनों में ही पढऩे के लिए विवश किया जाता है, हम दूसरे कॉलेजों की उतरन में शिक्षा प्राप्त करेगे.

अभी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन राजा भोज विश्वविद्यालय के परिसर में संचालित होता है, जिसके कारण प्रशासन व छात्रों के मध्य काफी दूरी हैं.

एडमीशन के लिए छात्रों की उपेक्षा

विश्वविद्यालय के ज्योतिष के छात्र आकाश नंदरधने शास्त्री ने बताया कि मैं तीन वर्षों से विभाग का एकमात्र विद्यार्थी हुं यहां ऐसे पाठयक्रम है, जो छात्रों का सर्वागिण विकास करते है पर फंड की कमी व छात्रों का कम रूझान के कारण ही मूलभुत समस्याएं यहां विघमान है.

Related Posts: