नई दिल्ली,

डोकलाम में चीनी सैनिकों के सर्दी में भी डटे होने के बीच विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से कहा है कि हमें आपसी विश्वास बढ़ाना चाहिए, बार-बार मिलना चाहिए.

सुषमा ने सोमवार को यहां चीन और रूस के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग मुलाकात की. चीन के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय मुलाकात को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पॉजिटिव और भविष्य की ओर देखने वाला बताया और कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई गति मिलेगी.

डोकलाम :1800 चीनी सैनिक फिर डटे

सिक्किम-भूटान-तिब्बत सीमा के पास डोकलाम क्षेत्र में 1600-1800 चीनी सैनिक फिर आ जमे हैं. वे यहां हेलिपैड्स, रोड और शिविरों को बनाने का काम कर रहे हैं.

सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि भारत को रणनीतिक लक्ष्य मिल गया है और अब चीन को दक्षिण की तरफ किसी भी हालत में सड़क का विस्तार नहीं करने दिया जाएगा. इस क्षेत्र में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान स्थाई रूप से रहते हैं.

एक सूत्र ने बताया, पहले डोकलाम में हर साल अप्रैल-मई और अक्टूबर-नवंबर में पीएलए के सैनिक आ जाते थे और इस पर दावा करते थे. 28 अगस्त को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव खत्म होने के बाद पहली बार ऐसा देखा गया है कि पीएलए ने भूटान क्षेत्र में अड्डा जमा लिया है.

हालांकि भारत के साथ यथास्थिति बनी हुई है.

आर्मी चीफ बिपिन रावत ने सितंबर में ही आगाह किया था कि चीन विवादित क्षेत्र में ताकत आजमाने की कोशिश करता रहेगा. इसलिए चुंबी वैली में रणनीति के तौर पर सैनिकों को तैनात किया गया है. यह सिक्किम और भूटान के बीच में मौजूद है. पहले डोकलाम में भारतीय सैनिक चीन के सैनिकों पर आपत्ति नहीं करते थे लेकिन जून में जब सड़क बनाने के लिए पीएलए ने यथास्थिति को तोडऩे की कोशिश की तो यहां की सुरक्षा कड़ी कर दी गई.

भारतीय जवानों ने चीन को सड़क बनाने से रोक दिया. इसके बाद पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले चीन ने अपने सैनिकों को 150 मीटर पीछे लौटा लिया. अब इस क्षेत्र में शांति है और भारत-चीन की सेनाएं 500 मीटर दूर रहती हैं. हालांकि लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल पर सैनिकों की चहलकदमी रहती है. सूत्रों के मुताबिक इसके बाद चीन ने डोकलाम में दक्षिण की तरफ सड़क बनाने की कोशिश नहीं की है.

डोकलाम इलाके में कूटनीतिक प्रयासों के बाद भारतीय पक्ष ने अपने हथियारों और सैनिकों को वापस बुला लिया. इससे पता चलता है कि दोनों देशों के रिश्ते किस स्तर के हैं और कितने महत्वपूर्ण हैं. भारत और चीन के बीच जितने मतभेद हैं, उससे कहीं ज्यादा साझा हित हैं.
-वांग यी, चीन के विदेश मंत्री

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