अहमदाबाद,  घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों की गिरावट का असर सूखे प्याज के निर्यात पर पड़ा है। उत्पादन के नए सीजन की शुरुआत में सूखे प्याज के निर्यात में 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। सूखा प्याज उद्योग में हर साल नई उपज और निर्यात जनवरी से शुरू होता है जो जुलाई तक चलता है। फिलहाल भारत हर रोज तकरीबन 300 टन सूखे प्याज का निर्यात करता है, जबकि पिछले साल के सीजन में यह 225-230 टन था।

प्याज के दामों में आई गिरावट से सूखे प्याज के भारतीय निर्यातक अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद के लिए 1700-1800 डॉलर प्रति टन की पेशकश देने लगे हैं, जबकि मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे प्रतिस्पर्धी देशों द्वारा यह पेशकश 2000-2300 डॉलर प्रति टन की है। पिछले तीन सालों में ज्यादा आपूर्ति की वजह से कच्चे प्याज की कीमतें थोक बाजार में 15 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 9 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई हैं। ऑल इंडिया डिहाइड्रेशन एसोसिएशन के अध्यक्ष वि_ïल कोरडिय़ा ने कहा, च्इस साल सूखे प्याज के उत्पादन और निर्यात के लिए नया सीजन अच्छा रहा है क्योंकि घरेलू प्याज की कीमतें गिरी हैं। इस वजह से उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले सूखे प्याज के कम भाव की पेशकश कर पाया है। इस सीजन में उद्योग का नया कारोबार लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा है।

आरंभिक रुझानों से लगता है कि इस साल उद्योग में 55,000 टन सूखा प्याज निर्यात करने की संभावना है जो पिछले साल के 25,000 टन से ज्यादा है। छतरिय फूड्स प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक असगर छतरिया के मुताबिक घरेलू बाजार में कच्चे प्याज की सही कीमत न मिलने से इस साल सीजन कुछ देरी से शुरू हुआ। अभी भी चालू कीमतें हमारे लिए महंगी हैं लेकिन हमें लग रहा है कि मार्च से बाजार में रबी का प्याज आने पर कीमतें और गिरेंगी। 2015 में सीजन के दौरान सूखे प्याज का निर्यात कच्चे प्याज की ऊंची कीमतों की वजह से 2014 के 48,000 टन से घटकर 25,000 टन हो गया था।

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