बच्चों के लिए सब कुछ सोशल मीडिया पर खुला

विनय अग्रवाल, ग्वालियर,

फिल्म अभिनेता व निर्माता निर्देशक राजा बुंदेला ने पदमावती फिल्म को लेकर रहे विवाद के बीच आज सेंसर की मौजूदगी पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अब सेंसर बोर्ड की जरूरत ही नहीं है, जब विभिन्न सोशल मीडिया और एप पर लोग बिना सेंसर के ही अच्छा-बुरा परिणाम जाने बिना वायरल होती चीजें देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आप स्वयं देखिये कि बच्चों के लिए सब कुछ सोशल मीडिया पर खुला है कोई प्रतिबंध नहीं है, और सेंसर फिल्मों में काट-छांट कर रहा है। आज अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान नवभारत से विशेष बातचीत में फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने कहा कि अब समाज परिपक्व हो गया है और अच्छे बुरे का निर्णय भी कर रहा है।

वहीं रचनात्मकता को लेकर आने वाली फिल्मों का विरोध किया जाता है और सेंसर बोर्ड के पांंच व्यक्ति १२५ करोड देशवासियों के लिए इसका निर्णय करते हैं।

यह कहां तक सही है । उन्होंने कहा कि क्या सोशल मीडिया, मोबाइल, एप पर सेंसर बोर्ड खुलेआम परोसी जाने वाली चीजों को रोक पा रहा है। यह निर्णय हमको स्वयं लेना होगा कि क्या सही है और क्या गलत। हम क्या देखें या क्या नहीं देंखे।

उन्होंने फिल्म पदमावती को लेकर कहा कि पदमावती जैसी फिल्म संजय लीला भंसाली ने बनाई, तो उन्हें स्वयं ही सोचना चाहिए था कि हम अपनी संस्कृति इतिहास को कैसे प्रस्तुत कर रहे हैं। अरे भाई फिल्म बनानी ही थी तो पदमावती की जगह रूपमति नाम रख देते तो क्या विवाद होता।

राजा बुंदेला ने कहा कि सारा खेल मीडिया ट्रायल से हुआ। जब फिल्म बनती है तो तीन माह पहले फिल्म को केन्द्रीय सेंसर बोर्ड में प्रस्तुत करनी होती है, लेकिन संजय लीला भंसाली ने पहले मीडिया ट्रायल में लेकर विवाद खडा करवा दिया। अब केन्द्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड ने सही कहा कि जब पहले मीडिया को ही दिखा दी तो हमारा क्या मतलब, तीन माह बाद फिल्म को सबमिट करके आना।

राजा बुंदेला ने कहा कि देश में मीडिया ट्रायल की परंपरा चल पडी है, जो कतई सही नहीं है। यदि फिल्म सेंसर के पास होकर आती तो अब तक चल रही होती और यदि कोई फिल्म के दृश्य को लेकर विरोध होता तो बाद में आम फिल्मों की तरह काट-छांट भी हो जाती।

राजा बुंदेला ने कहा कि फिल्म सकारात्मक विचारों के लिए होती है और इसका समाज में बेहतर संदेश जाता है। मैं तो संजय भंसाली से कहूंगा कि भैय्या अब आपको फिल्म को लेकर इतना विवाद व डर लग रहा है तो आपने इसका नाम पदमावती क्यों रखा कुछ और रख लेतेे, क्या आप भी स्वयं जानबूझकर विवाद तो फैलाने का मंसूवा नहीं रखते।

फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने कहा कि कलाकार को धमकी देना गलत है। क्योंकि कलाकार का स्वयं कुछ भी नहीं है। वह तो किराये का है, जो उसे बताया जा रहा है वैसा उसे पात्र में ढलना होता है। बुंदेला ने कहा कि अब उनकी रूचि ज्यादा फिल्म निर्देशन व निर्माण में है।

वह एलेक्स हिन्दुस्तानी , हनिया व अमृतलाल का निर्देशन कर रहे हैं। बतौर अभिनय उनकी शुरूआत व्रजभूमि व विजेता से हुई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अब स्वयं का प्रोडक्शन हाउस भी बना लिया है। बुंदेला ने छोटे पर्दे की भी वकालत की और कहा कि वह साफ सुथरे व ज्ञानवर्धक मनोरंजन के लिए पहल करते रहेंगे।

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