rajnathनयी दिल्ली,  गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि देश के संविधान की प्रस्तावना में शामिल ‘सेकुलर’ शब्द का सबसे ज्यादा राजनीतिक दुरुपयोग हुआ है और शायद यही वजह है कि संंविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने मूल संविधान में इस शब्द को नहीं जोड़ा था।

श्री सिंह ने डॉ़ भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती की याद में भारत के संविधान के प्रति वचनबद्धता पर लोकसभा में चर्चा का आरंभ करते हुए कहा कि सेकुलर का अर्थ पंथनिरपेक्षता होना चाहिए धर्मनिरपेक्षता नहीं।

उन्होंने कहा कि पंथनिरपेक्षता स्वाभाविक रूप से भारत के चरित्र में रची बसी है और डॉ़ अंबेडकर इस बात को समझते थे इसलिए उन्होंने मूल संविधान की प्रस्तावना में सेकुलर शब्द का उल्लेख नहीं किया था। इसे 42वें संशोधन के बाद इसमें जोड़ा गया था। गृहमंत्री ने कहा कि संविधान भारत की आत्मा का स्थायी प्रतिबिंब है और इसे एक पवित्र ग्रंथ के रूप में देखा जाना चाहिये।

संविधान में लिखित शब्दों का राजनीतिक दुरुपयोग नहीं होना चाहिये क्योंकि इससे सामाजिक सौहार्द बनाये रखने में कठिनायी होती है। सेकुलर शब्द का देश में सर्वाधिक दुरुपयोग हुआ है। इस पर विपक्षी सदस्यों ने कड़ा विरोध किया।

Related Posts: