ग्रेच्युटी व अन्य फंड को लेकर लगा रहा था हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय के चक्कर

नवभारत न्यूज भोपाल,

राजधानी के पर्यावास भवन स्थित हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब हाउसिंग बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारी एस.के.ए. नकवी ने मुख्यालय में आत्मदाह की कोशिश की. नकवी अपने साथ कैरोसिन से भरी हुई बोतल लाये थे. मुख्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने नकवी को ऐसा करने से रोक लिया.

प्राप्त जानकारी के अनुसार नकवी पिछले कई सालों से उनके विटायरमेंट के बाद ग्रेजुएटी और अन्य फंडों के रुपयों के लिये हाउसिंग बोर्ड के चक्कर लगा रहे थे. नकवी की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है, जिसके चलते उन पर मानसिक दबाव भी बना हुआ था और जिन लोगों से नकवी ने कर्ज ले रखा था, वह भी पैसों के लिये लगातार दबाव बना रहे थे, जिससे मजबूरन नकवी को आत्मदाह का कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा.

इस घटना के तुरंत बाद हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त रविन्द्र सिंह ने नकवी के फंड का भुगतान करने के आदेश दे दिये. सब मिलाकर कुल सात लाख बहत्तर हजार का बकाया था, जिसमें पांच लाख बानवे हजार का आरटीजीएस नकवी के खाते में मंगलवार को ही कर दिया गया. शेष राशि नकवी जिस कार्यालय पर रिटायरमेंट तक पदस्थ थे, वहां से सर्विस बुक मुख्यालय आ जाने के बाद भुगतान की जायेगी.

मंगलवार को हुये घटनाक्रम को लेकर एस.के.ए. नकवी ने बताया कि वह उच्च श्रेणी लिपिक के पद पर सम्पत्ति प्रबंधक कार्यालय विट्टन मार्केट में पदस्थ थे. बात 25 अक्टूबर-2010 की है. जब नकवी को एक झूठे रिश्वतकांड में फंसाया गया था और लोकायुक्त का छापा पड़ा था. उस समय नकवी की ड्राज में एक हजार रुपये मिले थे.

इस पर लोकायुक्त की विशेष अदालत में केस चला. इसी दौरान 30 जून 2011 को नकवी सेवानिवृत्त हो गये और केस चलने की वजह से रिटायरमेंट के बाद का पैसा रोक लिया गया. इसके बाद 15 दिसंबर 2014 को लोकायुक्त की विशेष अदालत का फैसला आया, जिसमें नकवी को बाइज्जत बरी कर दिया गया.

सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के अनुसार किसी भी कर्मचारी के बरी हो जाने पर उस कर्मचारी के रोके गये रिटायरमेंट के फंड का भुगतान करना होगा, इसको लेकर नकवी 2014 से ही लगातार मुख्यालय के चक्कर काट रहे थे.

नकवी ने यह भी बताया कि आज से करीब डेढ़ महीने पहले जब नकवी हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त रविन्द्र सिंह से उनके चेम्बर में मिले थे, तब आयुक्त रविन्द्र ङ्क्षसह ने उनके रिटायरमेंट के पैसों के भुगतान के एवज में पचास हजार रुपये की मांग की थी. नकवी ने आयुक्त द्वारा मांगी गई रिश्वत की बात पर कहा कि मैं शपथ लेता हूं कि आयुक्त ने मुझसे रिश्वत मांगी.

आयुक्त रविन्द्र सिंह ने यही कदम पूर्व में ही उठा लिया होता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती. स्थिति को समझकर तुरंत आदेश जारी कर फंड के भुगतान पर हम आयुक्त के आभारी हैं. साथ ही सभी अधिकारियों को चेतावनी देते हैं कि किसी भी कर्मचारी के प्रकरण को लटकाया गया तो कर्मचारी संघ ऐसे अधिकारियों का मुंह काला करने से भी पीछे नहीं हटेगा.
बलवंत सिंह रघुवंशी, प्रांताध्यक्ष
म.प्र.हाउ. बोर्ड कर्मचारी संघ

 

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