नवभारत न्यूज सीहोर,

जम्मू-कश्मीर में चार दिन पहले नसरूल्लागंज क्षेत्र के भिलाई गांव निवासी सैनिक की मौत हो गई थी. जवान का शव गुरुवार की सुबह गृहगांव पहुंचा. जहां हजारों लोगों ने उसे अंतिम विदाई दी.

चार दिन पहले मृत हुए सैनिक के शव का इंतजार परिजनों के अलावा ग्रामीण बेसब्री से कर रहे थे. खराब मौसम के कारण उसका शव नहीं आ पा रहा था. गुरुवार को तीन वाहनों से आर्मी के अधिकारी शव को लेकर गांव पहुंचे.

सैनिक का शव गांव में पहुंचते ही श्रद्धांजलि देने जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अमले से लेकर आमजन की भीड़ उमड़ पड़ी. एक साथ सभी ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी. इस दौरान सभी की आंखों से आंसू छलक उठे. जिले के भिलाई गांव निवासी 25 वर्षीय सैनिक इकाराम सामले सेना में भर्ती होकर पिछले करीब तीन साल से देश सेवा में लगे थे.

रविवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में उनकी मौत हो गई थी. इसकी सूचना मिलते ही गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई थी. हर कोई श्रद्धांजलि देने शव आने का इंतजार कर रहा था. मौसम की बेरूखी के चलते सैनिक का शव गुरुवार की अल सुबह करीब तीन बजे के करीब गांव पहुंच सका.

सैनिक के शव के गांव में पहुंचते ही जनप्रतिनिधियों से लेकर पुलिस, प्रशासनिक अमले सहित ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी.

सैनिक को श्रद्धांजलि देने वन विकास निगम अध्यक्ष गुरुप्रसाद शर्मा, प्रदेश मंत्री रघुनाथ सिंह भाटी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष रवि मालवीय, भाजपा नेता मारूती शिशिर, कलेक्टर तरूण कुमार पिथौड़े, एसडीएम एचएस चौधरी, प्रभारी तहसीलदार, समाज के सदस्य सुनील बारेला, अनुसूचित जनजाति युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष रमेश बारेला, जिला पंचायत सदस्य कैलाश बारेला, पूर्व सरपंच गेंदा राम बारेला, मार्केटिंग सोसायटी सदस्य लाल सिंह बारेला, घासीराम बारेला, काशीराम बारेला व अन्य पारिवारिक सदस्य सहित हजारों की तादाद में ग्रामीण उपस्थित थे.

सैनिक इकराम के शव के गांव पहुंचते ही जब वाहन से नीचे उतारा तो हर किसी की आंखे नम हो गई थी. हर कोई अंतिम दर्शन करने आतुर हो रहा था. इधर परिजन के भी रो-रोकर बुरे हाल थे. एक तरफ बेटे के जाने का गम था तो दूसरी तरफ सेना में होने का गर्व भी था. तीन गाडिय़ों से शव गांव में पहुंचा था.

लेह से आर्मी के दो अधिकारी साथ आए थे. गुुरूवार की दोपहर 12.30 के करीब गांव में ही घर के सामने सैनिक की अंत्येष्ठि की गई. समाज के युवाओं ने सैनिक को सलामी देकर श्रद्धांजलि दी. अंतिम संस्कार में मुखाग्रि सैनिक के मामा दोंगर सिंह द्वारा दी गई.