अंतरराष्टï्रीय बुलियन बाजारों में सोना के भाव में गिरावट का दौर जारी है. भारत के सराफा बाजारों में सोना के भाव लुढ़क कर 25,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गये हैं. इससे भारत में सोना खरीदी में उछाल आ रहा है और मांग बढ़ रही है. इंटरनेशनल गोल्ड समिट के आंकलन में भारत में सोना की डिमांड 900 से 1000 टन इस वर्ष रहने की उम्मीद है. जबकि पिछले वर्ष जब भाव ऊंचे चल रहे थे सोना की मांग 842 टन रही. भाव गिरने के कारण अभी सोना खरीदी का सीजन न होने के बाद भी लोग सोना खरीद रहे हैं.

आभूषणों की मांग बढऩे के कारण सोना की मांग में वृद्धि हुई है. अमेरिका की मौद्रिक संस्था फेडरल रिजर्व ने इस साल के अंत तक बैंक ब्याज दर बढ़ाने के संकेत दिये हैं इसका भी सोना पर असर पड़ा है और वह वहां भी गिरकर 1084 डालर प्रति औंस हो गया है.

भारत के बुलियन बाजारों में भारत सरकार की घोषित स्वर्ण नीति के संभावित प्रभावों पर नजर है. इस वर्ष 2015 के केंद्रीय बजट के भाषण में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने घोषणा की थी कि सरकार अशोक चक्र आकृति का सोने का सिक्का जारी करेगी. गोल्ड बांड भी जारी करेगी जिस पर फिक्स रेट का ब्याज दिया जायेगा. इन्हें सोना की फेस वेल्यू के अनुसार नकदी में भुनाया जा सकेगा.

सरकार ने गोल्ड मानीटाईजेशन स्कीम भी घोषित की है. इसके तहत अब लोग अपना भी गोल्ड बैंक खाते में जमा कर सकेंगे. इससे देश का बहुत सा सोना जो घरों व बैंक लॉकरों में अनुत्पादक रूप में रखा जाता है वह बैंकों के मार्फत चलन में आ जायेगा और खातेदार को ब्याज कमाकर देगा. ब्याज भी सोना के रूप में लिया जा सकेगा. इस सोना डिपाजिट पर बैंकों से गोल्ड लोन भी लिया जा सकेगा. इससे इतना ज्यादा घरों में रखा सोना बाहर आ जायेगा कि सोना आयात की भी जरूरत नहीं होगी. वर्तमान में भारत 600 से 650 टन सोना हर वर्ष विदेशों से आयात करता है. इस पर देश की निर्भरता भी काफी कम हो जायेगी.

भारत के प्राचीन इतिहास में राजाओं व धनाढ्य वर्ग द्वारा स्वर्ण मुद्रा व गोदान का बहुत जिक्र आता है. यह कल्पना भी सहज ही यथार्थ लगती है कि उन दिनों भारत में सोना की बहुत खदानें रही होंगी जो दोहन से खत्म हो गयी होंगी. आधुनिक इतिहास में भारत में केवल एक ही सोना खदान मैसूर में कोलार गोल्डमाइन थी जो खुदाई में इतने नीचे चली गयी है कि उससे गोल्ड ओर (अयस्क सोना) निकालना खर्चे से घाटे का धंधा हो गया और उस खदान को बंद कर दिया गया है.

भारत जो इतिहास में सोने की चिडिय़ा कहलाता था, आज विडम्बना यह है कि इस समय भारत में एक भी सोना की खदान नहीं है. ज्योलोजिकल सर्वे आफ इंडिया खोज में लगा है और कई जगह सोना होने के संकेत भी मिले हैं. बिहार में एक ‘स्वर्ण रेखाÓ नाम की नदी है. इसमें सोने के कण पाये जाते हैं.

वहां के स्थानीय लोग इन्हें इक_ïा भी कर उसे कमाई का ‘साइड बिजनेस’ बनाये हुए हैं. लेकिन यह इतना नहीं है कि उसे शासकीय स्तर पर बड़े रूप में किया जाए.
देश में पेट्रो क्रूड के बाद आयात में दूसरा सबसे बड़ा आइटम सोना ही है और वित्तीय घाटा (फिसकल डेफीशिट) में इसका प्रतिकूल असर पड़ता है. गत वर्ष 2014 में देश में सोना की मांग में 14 प्रतिशत की कमी आई थी. अब सोना के भाव गिर रहे हैं और उसकी वजह से मांग बढ़
रही है.

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