नई दिल्ली. मॉनसून की अच्छी बारिश से इस साल भारत में सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 10 फीसदी बढ़कर 1 करोड़ टन से ज्यादा होने का अनुमान है. इससे विश्व के इस सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक को नवंबर से शुरू हो रहे विपणन वर्ष में विदेशी खरीद घटाने में मदद मिलेगी, जिससे खाद्य तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें नीचे आएंगी. इससे भारत से सोयाखली का निर्यात भी बढऩे के आसार हैं.

उद्योग की मुंबई स्थित संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष प्रवीण लुंकड ने बताया, इस साल सोयाबीन का रकबा पिछले साल जितना ही रहेगा, लेकिन अच्छी एवं समय पर बारिश से उत्पादन में इजाफा होगा.ज् उन्होंने कहा, च्हमारा अनुमान है कि इस साल उत्पादन 1 करोड़ टन से ज्यादा रहेगा, जो पिछले साल 90 लाख टन था.ज् लुंकड ने उद्योग के एक सम्मेलन से इतर कहा कि देश में सोयाबीन के शीर्ष उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र- में 1 जून से चार माह के मॉनसून सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक सामान्य से अच्छी बारिश हुई है. इससे इन राज्यों में किसानों को तेजी से बुआई करने में मदद मिली है. इन दोनों राज्यों का सोयाबीन के उत्पादन में 85 फीसदी से ज्यादा योगदान होता है. लुंकड ने कहा कि वर्ष 2015 में सोयाबीन उत्पादन बढऩे से घरेलू कीमतें नीचे आ सकती हैं, जिससे दक्षिणी एशियाई देशों और ईरान को पशु आहार का निर्यात करना फायदेमंद हो जाएगा. पिछले साल सूखे से सोयाबीन की अगेती फसल प्रभावित हुई थी, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें वैश्विक बाजारों से काफी ऊपर बनी रहीं. इस वजह से इस साल अब तक सोयाखली का निर्यात घटा है.

तेल भी ज्यादा आएगा – अगर सूखा पड़ा तो भारत का खाद्य तेल आयात अक्टूबर में समाप्त होने जा रहे विपणन वर्ष 2014-15 में 12 फीसदी बढ़कर 1.3 करोड़ टन हो सकता है. पाम तेल सस्ता होने से खपत बढ़ी है. उन्होंने कहा, च्मई की तरह जून में भी आयात ज्यादा रहेगा. पेराई के लिए घरेलू तिलहन की आपूर्ति सीमित है और इस महीने आयात की खेप आने में भी देरी होगी.ज् भारत का खाद्य तेल आयात मई में 13.5 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहा. भारत पाम तेल का आयात मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है, जबकि सोया तेल का आयात अर्जेन्टीना और ब्राजील से.

देश में मूंगफली के शीर्ष उत्पादक राज्य गुजरात में इस फसल का रकबा 20 फीसदी बढ़ सकता है, क्योंकि कपास से कम आमदनी के कारण किसानों का अन्य फसलों की ओर रुझान बढ़ा है. एक महीने बाद चीन भारतीय सरसों की खल का आयात फिर से चालू कर सकता है.
गौरतलब है कि चीन ने मिलावट की आशंकाओं के कारण वर्ष 2011 के अंत में भारत से सरसों की खल का आयात रोक दिया था.

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