विश्व के कई देशों ने जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सौर ऊर्जा को अपनाया है। भारत में स्थिति काफी अनुकूल है। साल में कम से कम १० माह सौर किरणें भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं।

डेनमार्क, फिनलैंड और चीन में सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया गया है। सौर मोर्चे पर हमारी स्थिति काफी मजबूत है। जब ये देश आगे बढ़ सकते हैं तो हम तो आसमान छूने की स्थिति में है। आवश्यकता आमजन में इच्छा शक्ति के विकास की है।

दरअसल, ऊर्जा के अपरंपरागत स्रोतों जिनमें सौर ऊर्जा भी शामिल है, का उपयोग भारत में प्राचीन काल से होता आया है। सूर्य भगवान को अर्ध्य देने की परंपरा सभ्यता के विकास के साथ ही विकसित हो गई थी।सौर ऊर्जा से अनाज और सब्जियां सुखाना तथा पवन चक्कियों से सिंचाई प्राचीन परंपरा रही है।

जीवाश्म ईंधन की खोज के साथ ही ऊर्जा के ये परंपरागत स्रोत न मालूम कब से अपरंपरागत हो गए ।

सत्तर के दशक में तेल उत्पादक देशों ने कच्चे तेलों के दामों में जब-तब बढ़ोतरी की दादागिरी दिखाई, तब भारत का ध्यान फिर पुरानी परंपराओं की तरफ गया। भारत विश्व में एकमात्र ऐसा देश बना, जहां पृथक से गैर परंपरागत ऊर्जा मंत्रालय का गठन किया गया। आज इसे नवीन और नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के नाम से जाना जाता है।

सौर ऊर्जा का दोहन किफायती होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल है। जीवाश्म ईंधन जैसे डीजल, पेट्रोल के उपयोग से जहरीली गैसेें पर्यावरण में जहर घोलती हैं। कच्चे तेल के आयात से विदेशी मुद्रा भुगतान संतुलन पर दबाव आता है।

डीजल, पेट्रोल की आपूर्ति का खर्च और परिवहन से होने वाले प्रदूषण की समस्या रहती है, जबकि सौर ऊर्जा तो विकेंद्रित है। जहां चाहें, सौर पैनल, सौलर कूकर लगा इसका दोहन किया जा सकता है।ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से परंपरागत (फ्लड) सिंचाई, टपक सिंचाई और फव्वारा सिंचाई की प्रणाली उपयोग की जाने लगी है।

सौर ऊर्जा से रात में उजाले की तकनीक भी काफी विकसित हो गई है। सौर लालटेन और सौर प्रकाश पथ का उपयोग जगह-जगह होने लगा है।सौर चक्की के उपयोग से घरेलू जरूरत पूर्ति अनाज पिसाई भी संभव है।

ऊर्जा के परंपरागत साधन जैसे डीजल और बड़े बांधों से उत्पादित बिजली कई मर्तबा बाधित होती है। यदि सौर ऊर्जा दोहन की तकनीक अपनाई जाए तो बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम रहेगी।

‘गांव की सौर ऊर्जा गांव में’ और ‘शहर की सौर ऊर्जा शहर में’ के नारे को प्रचारित किया जाए। गांवों और शहरों में जल संरक्षण समितियों की तरह सौर ऊर्जा उपयोग समितियां और सौलर क्लब गठित हों। जन जागरण हो। सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है। भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व को पछाड़ने की ताकत निहित है।