भारत अपनी बढ़ती हुई ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिये ऊर्जा के सभी क्षेत्रों में सघन प्रयास कर रहा है. इसी संदर्भ में उसका जर्मनी के साथ सौर ऊर्जा के कार्यक्रम चल रहे है. हाल ही में दोनों देशों ने अपना सहयोग इस क्षेत्र में और आगे बढ़ा दिया है.

जर्मनी की चांसलर एंजिला मार्केल इन दिनों भारत की यात्रा पर आयी हुई है. दोनों देशों के बीच सौर ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, रेलवे आदि पर 18 महत्वपूर्ण समझौते हुए है. जर्मनी पहले से ही भारत को सौर ऊर्जा के विकास में ग्रीन एनर्जी कोरिडोर योजना के तहत 1.5 बिलीयन यूरो की सहायता दे रहा है. और इस हाल के दौरे में एंजिला मार्केल ने अतिरिक्त एक बिलीयन यूरो सौर ऊर्जा के विकास के लिये दिये है.

भारत देश में पूरे साल दिन भर सूर्य रहता है. लेकिन सौर ऊर्जा में हमारा विकास और उत्पादन नगण्य स्थिति में है. हमारे यहां कोयला से उत्पन्न ताप (थर्मल) विद्युत सर्वाधिक 70 प्रतिशत है. इसमेें कोयला जलाने को एक ऊर्जा को जलाकर दूसरी ऊर्जा पैदा करना कहा जाता है. इसे खदानों में विद्युत गृह ढोकर लाने पर भी भारी खर्च आता है. साथ ही इसमें निष्पादित न की जाने वाली राख (फ्लाई ऐश) बहुत होती है. भारत में जल विद्युत लगभग 20 प्रतिशत भाग ही है. अब भारत में अमेरिका, रूस, ब्रिटेन व फ्रांस से समझौते कर देश में परमाणु ऊर्जा को विकसित किया है और इस कार्यक्रम को और बढ़ाया जा रहा है. इसके साथ ही देश में हरित ऊर्जा के नाम से सौर ऊर्जा को भी विकसित किया जा
रहा है.

भारत में इस समय 1500 से ज्यादा जर्मन कम्पनियां काम कर रही हैं और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अंतर्गत जर्मनी से और ज्यादा निवेश आने लगा है.
जर्मन चांसलर मार्केल व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के बीच 18 नये करार करके दोनों देशों के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ कर
लिया है.

भारत के साथ रक्षा के क्षेत्र में सभी विकसित देश अपने भागीदारी चाहते हैं. हथियारों के अंतरराष्टï्रीय क्षेत्र में भारत बहुत बड़ा खरीददार है. इस दौरे के समय जर्मनी में भी भारत ने रक्षा समझौते किये हैं. भारत सौर ऊर्जा को अपनी पूरी ऊर्जा जरूरत का 40 प्रतिशत भाग सन् 2030 तक बनाना चाहता है. इसके लिये उसे 2.5 ट्रीलियन डालर की धनराशि चाहिए और उस दिशा में तेजी से कदम उठाये जा रहे हैं. भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका, रूस के सहयोग से परमाणु संयंत्र बढ़ातेे जा रहा है. जापान में फूकूशिमा में परमाणु संयंत्र की दुर्घटना से इस क्षेत्र का विरोध काफी बढ़ गया है. सौर ऊर्जा न सिर्फ भारत बल्कि सारी दुनिया को सबसे सस्ता और हमेशा उपलब्ध साधन दिख रहा है. सौर ऊर्जा से ही संसार की रचना और जीवन का विकास हुआ है और अब यही सूर्य सारे विश्व का सबसे स्वस्थ व स्वच्छ ऊर्जा का स्त्रोत बनने जा रहा है. भारत के इस दिशा में प्रयास उसे प्राकृतिक ऊर्जा से प्रगति के पथ में तेजी से ले जायेंगे.

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