परेशान मरीज दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर

भोपाल, राजधानी में डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल फीवर लोगों पर भारी पड़ रहे हैं. सबसे अधिक प्रभावित 5 लाख गैस पीडि़त हैं, जिन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है. शाकिर अली अस्पताल इतना बदहाल है कि यहां मेडिकल स्टाफ एवं चिकित्सक भी काफी कम हैं एवं मरीजों को अन्य अस्पतालों के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं.

मरीजों की लंबी-लंबी कतारें ओपीडी के बाहर देखने को मिल रही हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर से ही शाकिर अली अस्पताल में रोजाना करीब 1000 मरीजों का ओपीडी रजिस्ट्रेशन हो रहा है.

शाकिर अली अस्पताल की क्षमता 90 बेड की है और स्टाफ मात्र 30 बेड का ही उपलब्ध है, उस पर भी जानकारी अनुसार स्टाफ में कई लोग पिछले दिनों छुट्टïी पर थे. अस्पताल में तृतीय तल बंद है और कहा जा रहा है क पुताई चल रही है.

जेपी में नहीं हुआ इलाज, 20 डॉक्टर्स राष्ट्रपति  की ड्यूटी पर

पिछले डेढ़ महीने से डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल फीवर के प्रकोप के चलते राजधानी का कोई भी अस्पताल इससे अछूता नहीं रहा है. जिला चिकित्सालय जे.पी. अस्पताल में भी रोजाना करीब 1520 मरीज ओपीडी में लाइन लगाकर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं.

इसी कड़ी में शुक्रवार को भी जेपी अस्पताल में लंबी-लंबी कतारें ओपीडी में लगी हुई थीं पर राष्ट्रपति  के आगमन पर करीब 20 डॉक्टर्स की ड्यूटी लगी होने के कारण मरीजों को उपचार नहीं मिल सका.

राजधानी के सबसे बड़े हमीदिया अस्पताल में भी रोजाना करीब 2000 मरीज उपचार हेतु पहुंच रहे हैं. यहां भी ओपीडी के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. हमीदिया की स्थिति पर अधीक्षक डॉ. मरावी कुछ भी कहने से बच रहे हैं.

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