भारत का अंतरिक्ष संस्थान इसरो भारत का संभवत: एक मात्र ऐसा संस्थान जो लगातार राष्टï्र को प्रगति के नये-नये सोपानों में ले जा रहा है. हर चुनौती को अपना कर्तव्य समझ राष्टï्र को आत्मविश्वास भी दिया.

अंतरिक्ष विज्ञान में इसरो ने भी ऐसा स्पेस शटल बनाकर अंतरिक्ष भेजकर उसे सफलतापूर्वक उतार भी लिया. इसके साथ ही भारत चार अन्य राष्टï्र अमेरिका, रूस, फ्रांस और जापान के साथ वह पांचवा राष्टï्र बन गया जो अंतरिक्ष में जाने वालों के साथ आने वाले भी हो गये. श्री हरिकोटा के सतीश धवन स्पेस में इस शटल के अंतरिक्ष में भेजकर अंतरिक्ष में एक और कीर्तिमान स्थापित हो गया. इसे बंगाल की खाड़ी में तट से 500 किलोमीटर की दूरी पर उतार लिया गया.
इसरो राष्टï्र का अत्यन्त भारी फंड का वह संस्थान है जिसने राष्टï्र को सतीश धवन और भूतपूर्व राष्टï्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक दिये. इस स्पेस शटल को श्री कलाम का ही नाम दिया जा रहा है.

सिर्फ एक बार इसरो के बारे में यह सुनने में आया कि उसके निकट विदेशी जासूसों की पहुंच हो गयी है. लेकिन तुरन्त जांच में पता चला कि वह महज अफवाह थी. इसरो पर कोई संकट नहीं है.

स्पेस शटल कार्यक्रम को पूरी तरह लागू करने में अभी भारत को 10 से 15 वर्ष तक का समय और लग सकता है. राष्टï्रपति श्री प्रणव मुखर्जी उप राष्टï्रपति श्री हमीद अंसारी और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को इस उत्कृष्टï सफलता के लिये बधाई दी है. वायुमंडल में ध्वनि से 5 गुना अधिक गति से प्रवेश किया और बंगाल की खाड़ी में वापस आने की पूरी प्रक्रिया में 770 सैकण्ड का समय लगा. स्पेस शटल की पूरी तकनीक विकसित हो जाने के बाद अंतरिक्ष अभियानों का खर्च 10 गुना कम होकर 2 हजार डालर प्रति किलो ग्राम हो जायेगा. इस शटल परियोजना में पांच साल का समय लगा और 95 करोड़ रुपये लागत आई है.

इसरो ने अंतरिक्ष के साथ-साथ भारत के रक्षा कार्यक्रम को मिसाइल प्रणाली देकर भी भारत की मारक क्षमता में भी कीर्तिमान स्थापित किया है. अंतरिक्ष वैज्ञानिक श्री ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन की उपाधि दी गयी है. परमाणु युग में भी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने प्रवेश कराया और उन्हीं के समय में भारत का प्रथम परमाणु परीक्षण राजस्थान के पोखरन में किया गया था. तिरुवनंतपुरम में इसरो का मुख्यालय, आंध्र के श्री हरिकोटा में उसका लांचिंग पेड, ओड़ीसा के बांदीपुर में मिसाइलों का काम और पोखरन में परमाणु परीक्षण भारत की प्रगति के तीर्थ हैं. मुम्बई मंझगाव नेबल डाकयार्ट में युद्ध दोनों ओर सामरिक पनडुब्बियों का निर्माण भारत की प्रगति के कदम हैं. हमें अपनी उपलब्धियों पर गौरव होना चाहिए. इसी भावना से भारत ने महान वैज्ञानिक डाक्टर अब्दुल कमाल को भारत का राष्ट्रपति बनाया. अब भारत का स्पेस शटल यान को श्री कलाम का नाम दिया.