मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की थी और एक साल पूरा होने के बाद उनका क्रियान्वयन 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी करने जा रहे हैं. इनमें फिलहाल 61 स्मार्ट सिटी और 376 अमृत सिटी बनाये जायेंगे. स्मार्ट शहरों से लगे शहरों को अमृत योजना की तरह विकसित किया जायेगा.

भोपाल और मध्यप्रदेश के लिये यह राष्टï्रीय गौरव का विषय है कि केन्द्र सरकार देश में एकमात्र भोपाल शहर को ही ‘जीने लायक शहर’ (लिवेवल सिटी) माना है. हालांकि भोपाल में रहने वाले यह महसूस करते हैं कि मानसून की पहली बरसात में ही शहर ‘चलने लायकÓ भी नहीं था. दुकान खोलते ही दिन-दहाड़े लूट हो जाती है. लोग दुकान से घर के दरवाजे पहुंचते ही लुट जाते हैं. इस हिसाब से यहां जीना मुश्किल में भी हो रहा है. वैसे इस तरह के हालात सभी जगह हैं.

स्मार्ट सिटी में मध्यप्रदेश को 7 शहर मिले हैं. जिसमें राजधानी भोपाल सहित अन्य महानगर इंदौर, ग्वालियर तथा बुरहानपुर, गुना, जबलपुर हैं. एक और शहर अभी तय होना है. इस समय 17 राज्यों में यह लागू हो रहा है और सभी राजधानी शहर इसमें शामिल हैं.

योजना के अनुसार इनमें अन्तरराष्ट्रीय स्तर की संरचना, स्वच्छता की आधुनिकतम तकनीक, पानी, बिजली, कचरा निष्पादन, सिटी ट्रान्सपोर्ट, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सुरक्षा, जन संचार, ऊर्जा संरक्षण, हरित भवन, पार्किंग यातायात संचालन विकसित होगा. जिन भी शहरों के नाम दिये गये हैं उन सबमें पहले मास्टर प्लान, विकास प्राधिकरण, साडा (स्पेशल एरिया डेवलपमेंट) के नाम पर कई योजनायें लागू की जा चुकी हैं. राजधानी भोपाल में एक पूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह ने हर झुग्गी को उसी जगह पट्टा दे दिया और उनके बाद दूसरे मुख्यमंत्री श्री मोतीलाल वोरा ने कहा कि इससे तो भोपाल और राज्य भर मास्टर प्लान ही गड़बड़ा गये.

अब स्मार्ट शहरों के आसपास अमृत शहर बनेंगे. इससे पहले मास्टर प्लानों की खिल्ली उड़ाते हुए शहरों के आसपास बरसों तक अवैध मानी जाने वाली विशाल हाऊसिंग कालोनी बन गयी और बाद में सरकार ने यह अवैध काम कर डाला कि अवैध कालोनियों को वैध कर दिया जायेगा.

नगर विकास की अब तक अनेकों योजनाएं हर जगह बनायी जा चुकी हैं. पर हालात नहीं सुधरे. अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से क्या करिश्मा होगा यह देखना होगा. राजधानी भोपाल में एक ”केपिटल प्रोजेक्ट” भी बना था और नयी राजधानी को वर्तमान स्वरूप उसी ने दिया था.

भारत में आजादी से पहले दो स्मार्ट शहर जयपुर और बंगलौर और बंगलौर से लगा मैसूर शहर ही उस समय का अमृत शहर कहा जा सकता है. इन शहरों को बनाने का श्रेय एक समर्पित व्यक्ति सर मिर्जा इस्माइल को जाता है. जयपुर ‘गुलाबी शहरÓ बना और बंगलौर ”गार्डन सिटी” बना. पूरा मैसूर एक बहुत खूबसूरत पार्क कहा जाता रहा. भोपाल को अपनी शासकीय सीमाओं में स्वर्गीय एम.एन. बुच ने भी काफी संवारा है. सेवाकाल के बाद उन्होंने भोपाल का मेयर बनना चाहा लेकिन राजनीति में ‘फिट’ नहीं हुए.

कभी मास्टर प्लान, कभी स्पेशल एरिया और इन दिनों मध्यप्रदेश में जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना भी चली. इसी में सड़कें चौड़ी, उनके किनारों पर फुटपाथ बैंच और बगीचे, स्टार बस सिस्टम शुरू हुए हैं. नाम बदल-बदल कर योजनायें आती हैं- लोगों को सब्जबाग दिखा जाती हैं और शहर सब्जी बाजार की तरह फैले-बिखरे बने रहते हैं. स्मार्ट सिटी का तहे दिल से स्वागत है- उम्मीद पर दुनिया कायम है. फिर एक विकास योजना आयी है. सत्ता परिवर्तन तो हो गया अब ढर्रा परिवर्तन भी होना चाहिये.

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