smart-cityमुंबई,  मोदी सरकार ने देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। लेकिन, शहरों के विकास के लिए 150 अरब डॉलर यानी 10 लाख करोड़ रुपये की भारी पूंजी की आवश्यकता होगी। इस भारी-भरकम रकम को सरकार को निजी सेक्टर से भी मदद लेकर जुटाना पड़ेगा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्ट सिटीज के विकास के लिए कुल 120 अरब डॉलर की रकम निजी सेक्टर के जरिए जुटाई जाएगी। केंद्र सरकार पहले ही 7.51 अमेरिकी डॉलर की रकम से स्मार्ट सिटी मिशन और अमृत योजना की शुरुआत कर चुकी हैं। इस रकम से 500 छोटे-बड़े शहरों का विकास किया जाएगा। डेलॉयिटे इंडिया के सीनियर डायरेक्टर पीएन सुदर्शन ने कहा, च्स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए राशि की व्यवस्था करना चिंता की वजह है।

लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती स्मार्ट सिटी परियोजना के प्रबंधन, सरकारी नीति-निर्माण और नियंत्रण है। सरकार ने हाल ही में पहले चरण में स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए देश के 20 शहरों का ऐलान किया था। इस सूची में सरकार की ओर से भुवनेश्वर, पुणे, जयपुर, सूरत, कोच्चि, अहमदाबाद, जबलपुर, विशाखापत्तनम, शोलापुर, इंदौर, नई दिल्ली, कोयम्बटूर, उदयपुर, गुवाहाटी, चेन्नै, लुधियाना और भोपाल जैसे शहर शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इन शहरों के विकास के लिए सर्विस प्रोवाइडर्स को शहरों में वाई-फाई नेटवर्क जैसी सुविधाओं के विस्तार पर खर्च शुरू करना होगा। यही सुविधा स्मार्ट सिटी के विकास के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगी। स्मार्ट शहरों के विकास में रिलायंस जियो की अहम भूमिका हो सकती है।

रिलायंस जियो की ओर से 2016 में करीब 50 शहरों में वाई-फाई की सुविधा दी जा सकती है। इसके अलावा भारती और वोडाफोन जैसी कंपनियों इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। फेसबुक भी बीएसएनएल के साथ मिलकर देश के 100 से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में वाई-फाई सुविधा देने के लिए प्रयासरत है।

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