प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्टï्र की सांस्कृतिक व प्राचीन राजधानी पुणे से उनकी सरकार की स्मार्ट सिटी योजना का शुभारंभ 25 जून को कर दिया. पहले दौर में देश के 20 नगरों में यह योजना इस उद्घाटन के साथ ही शुरू हो गयी है. देश में 69 ऐसी स्मार्ट सिटी बनना है. इन पर 1779 करोड़ रुपयों की लागत आयेगी. इन 20 शहरों में मध्यप्रदेश के तीन भोपाल, इंदौर और जबलपुर शामिल है.

मध्यप्रदेश में स्मार्ट सिटी योजना के प्रभारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव है. इस योजना से वे ग्रामीण विकास के साथ-साथ स्मार्ट सिटी विकास मंत्री भी हो गये है. भोपाल में इस दिन श्री भार्गव ने स्मार्ट सिटी कार्यशाला से इसे प्रारंभ किया और यह घोषणा कर दी. देश के 20 नगरों में यह काम शुरू हो गया है और देश में स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होने वाला पहला शहर भोपाल ही होगा.
स्मार्ट सिटी के योजना के निर्धारित लक्ष्य है- विश्व स्तरीय यातायात प्रणाली, 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति, स्मार्ट शिक्षा, पर्यावरणीय वातावरण, सरकारी कामें में एकल खिड़की (सिंगल विंडो) प्रणाली, शहर में कहीं भी पहुंचने के लिये 45 मिनिट से ज्यादा का समय न लगे और सुरक्षा व मनोरंजन की व्यापक व विस्तारित सुविधाएं.

भोपाल में स्मार्ट सिटी की योजना पहले शिवाजी व तुलसी नगर में थी, लेकिन इसका व्यापक विरोध होने पर इसे उत्तर टी.टी. नगर का क्षेत्र कर दिया गया है. इसी संदर्भ में भोपाल के मेयर श्री आलोक शर्मा व नगरीय प्रशासन मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि विकास शुरू होते ही विरोध करना फैशन हो गया है. अगर पेड़ न काटे, सड़क न चौड़ी करे तो काम होगा कैसे? ऐसे ही संकेत प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देते हुए कहा कि शहरीकरण को संकट नहीं विकास का अवसर समझें. यह प्रोजेक्ट जनभागीदारी से आन्दोलन बन गया है. सबकी यह इच्छा होनी चाहिए कि उनका शहर ‘नम्बर एक’ बने.

शहरों में गरीबी को पचाने की क्षमता होती है. शहरों को इतना सामथ्र्यवान बनाना चाहिए कि गरीबी मिटाई जा सके. उन्होंने राज्यों को आगाह किया कि स्मार्ट सिटी के अंतर्गत केन्द्र सरकार राज्यों को उसी समय फन्ड देगी जो यह साबित करते रहेंगे कि उनके यहां समयबद्ध तरीके से काम हो रहे हैं अन्यथा यह भी संभव है कि जहां ऐसा काम नहीं होगा उन शहरों को स्मार्ट सिटी योजना से बाहर कर दिया जाए.

यू.पी.ए. सरकार के शासन काल में ऐसी ही योजना चल रही थी जिसे जवाहरलाल नेहरू नगरीय पुनर्निर्माण योजना के नाम से चलाया जा रहा है और इस योजना में भोपाल सहित अनेक नगरों में सड़कों को चौड़ा करना, उनके बीच में नगरीय बस के लिए ‘डेडीकेडिट कोरीडोर’ भी बनाये गये हैं, फुटपाथ भी बहुत ही सुन्दर और बंगलुरू की सड़कों के समान उनमें बगीचे में लगाये गये हैं.

स्मार्ट सिटी इस समय पूर्व की नेहरू अर्बन रिन्यूएबिल योजना का न सिर्फ नया नाम है बल्कि योजना को बहुत बड़े पैमानों पर बड़ा भी कर दिया है. संसदीय जनतंत्र में सरकारें तो बदलती रहती है लेकिन प्रगति में निरन्तरता और गति लगातार बढ़ती हुई चलते रहना चाहिए.

शहरों में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की हो गयी है. गाडिय़ां भी आबादी की तरह बढ़ती जा रही है. फुटपाथ सड़कों के किनारे पार्किंग बन गये है. घरों में गाड़ी रखने की जगह नहीं है. उन लोगों ने सड़कों किनारे को ही उनका गैरिज बना दिया है. नगरीय समस्या में पार्किंग की समस्या यह सबसे जटिल और जरूरी है.

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