भारत चीन की गतिविधियों के कारण हिन्द महासागर और प्रशांत महासागर में अपने समुद्री दायित्वों के प्रति पूरी तरह सजग हो गया है. प्रशांत क्षेत्र के राष्ट्रों के अलावा विश्व के अन्य राष्ट्र जिनमें अमेरिका व यूरोपीय देश शामिल हैं, भारत से यह अपेक्षा करने लगे हैं कि वह हिन्द महासागर व प्रशांत महासागर में अपने समुद्री दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह सक्षम हैं.

जापान-अमेरिका व आस्ट्रेलिया ने भारत के साथ मिलकर प्रशांत महासागर क्षेत्र में अंतराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों को सदा की तरह अंतराष्ट्रीय जन सीमा बनाये रखने के लिए आपसी सहयोग समझौता किया है.

चीन ने हिन्द महासागर क्षेत्र में श्रीलंका में 99 साल की लीज पर एक बन्दरगाह अपने संचालन में लिया है.
भारत ने मुम्बई नौसेना कमान्ड में 14 दिसम्बर को स्वदेश में बनी डीजल संचालित गैर परमाणु पनडुब्बी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हाथों समुद्र में उतार दी.

भारत इसी तरह की पांच और पनडुब्बियां 2020 तक अगले तीन सालों में नौसेना तैयार करने जा रही है. भारत की समुद्री सीमा देश के तीन ओर पूर्व-दक्षिण और पश्चिम में 7 हजार किलोमीटर लम्बी है. इसके तीन नौसेना कमाण्ड पूर्व में विशाखापट्टनम, दक्षिण में कौच्चि और पश्चिम में मुम्बई में स्थित है.

भारत की नौसेना की पहुंच में तीन सागर- हिन्द महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी है. देश के तीन तरफ समुद्री सीमा के कारण हमारा समुद्री दायित्व भी भारी-भरकम है.

14 दिसम्बर को 17 साल के बाद लड़ाकू पनडुब्बी ”कलवरी” मिली है. जिसका केरल की मलयालम भाषा में अर्थ खूंखार समुद्री ”शार्क” है. इस कलवरी के निर्माण में फ्रांस का सहयोग रहा है और मेक इन इंडिया के तहत इसे भारत में ही मझगांव डाकयार्ड में बनाया गया है. पनडुब्बी निर्माण योजना के तहत फ्रांस में 23 हजार करोड़ रुपयों का करार हुआ है.

कलवरी को पानी में उतारते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इसे ”सागर” नाम दिया है. यह भारतीय नौसेना में शामिल हुई 16वीं और भारत में निर्मित हुई पहली पनडुब्बी है. इस पनडुब्बी की यह विशेषता है कि यह 1564 टन वजनी, 67.5 मीटर लम्बी, 12 मीटर ऊंची और 1020 किलोमीटर तक जा सकती है तथा 120 दिन पानी के अंदर रह सकती है.

भारत की नौसेना में पहली पनडुब्बी 8 दिसम्बर 1967 में शामिल हुई थी. इस समय भारतीय नौसेना में युद्धपोतों और विमान वाहक युद्धपोत व सामरिक पनडुब्बियों की ऐसी शक्ति हो गयी है कि वह सभी प्रकार के एन्टी सरफेस वार फेयर, एन्टीसबमेरीन वार फेयर, इन्टेलीजेन्स इनपुट व माइन बिछाने का काम कर सकने की क्षमता रखती है.

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