भोपाल,  मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के चार मामलों सहित कुल सात मामलों पर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।

आयोग द्वारा आज यहां प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल के पंचशील नगर बंगाली काॅलोनी में रहने वाले धर्मेन्द्र गन्नोते की गर्भवती पत्नी राखी को सुल्तानिया जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां महिला को बेहोशी का इंजेक्शन लगाने के बाद डाॅक्टर सुई निकालना ही भूल गए। महिला 17 घंटे तक दर्द से तड़पती रही लेकिन डाॅक्टरों ने परिजन की नहीं सुनी। बाद में महिला की जांच पर पता चला कि उसकी रीढ़ की हड्डी में ढाई इंच लंबी सुई डली हुई है।
आयोग ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानकर संज्ञान लेते हुए भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से प्रतिवेदन तलब किया है।

आयोग के अनुसार ग्वालियर के कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान में टीकमगढ़ से अपनी पत्नी का इलाज कराने आए सुखलाल अहिरवार को बिना जांच के इसलिए भगा दिया गया क्योंकि उसके पास जांच के लिए पैसे नहीं थे। सुखलाल के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे अपनी कैंसर पीड़ित पत्नी को ऑटो में बिठाकर जेएएच अस्पताल ले जा सके। मजबूरन उसने पत्नी को कंधे पर बिठाकर डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय की।

इसी प्रकार दूसरी घटना ग्वालियर के जेएएच अस्पताल की है, जहां शनिवार को लावारिस लाश लेकर 108 एम्बुलेंस करीब साढ़े तीन घंटे तक पत्थर वाली बिल्डिंग से लेकर केजुअल्टी के चक्कर काटती रही। मेडीसिन वार्ड के डाॅक्टर यह कहकर लाश को केजुअल्टी भेज देते थे कि मरीज मृत आया है और केजुअल्टी के स्टाफ ने यह कह दिया कि शव को पोस्टमार्टम भवन में रखकर पुलिस को सूचना दे दो।

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