05accident3खिरकिया 5 अगस्त. खंडवा-इटारसी रेल जंक्शन के बीच खिरकिया-भिरंगी रेलवे टे्रक पर खिरकिया रेल्वे स्टेशन से दस किमी दूर मंगलवार की रात साढ़े ग्यारह बजे डाउन ट्रेक पर 11071 कामायनी एक्सप्रेस एवं अप ट्रेक पर 13201 जनता एक्सप्रेस के एक साथ पुलिया की रेल लाइन से गुजरने के दौरान पुलिया के धंसने से दोनों ट्रेनों की बोगियां पलट गई. इससे बोगियों में सवार यात्रियों में से आधा सैंकड़ा यात्रियों की मौत हो गई. जबकि सैंकड़ों की संख्या में यात्री घायल हुए.

मृतकों की और ज्यादा होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. हालांकि देर शाम तक रेल विभाग ने हादसे में 37 लोगों की मौत की पुष्टि की है. हादसे में जनता एक्सप्रेस के इंजन सहित छह बोगियां तथा कामायनी एक्सप्रेस के पीछे की दस बोगियां पलट गई. यह हादसा इतना भीषण था कि दो ट्रेक पर घटना होने के बाद ट्रेन की बोगियां पलटने के बाद आपस में भिड़ गई. रात में हुई इस घटना में ट्रेन में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई.

हादसे के दौरान बारिश होने एवं पुलिया पर बाढ़ का पानी होने से यात्री अपना बचाव नहीं कर सकें. जिन यात्रियों ने बोगियों से बाहर निकलने की कोशिश की, उनमें से अधिकांश पानी के बहाव में बह गए. जबकि दो यात्रियों की रेलवे की बिजली लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई. पूरी घटना में रेलवे की लापरवाही उजागर हुई है जिस पुलिया पर हादसा हुआ, उस पर से घटना के दस मिनट पहले ही कटनी-भुसावल पैसेंजर ट्रेन गुजरी थी. इसके बाद भी रेलवे प्रशासन अलर्ट नहीं हुआ.

 

एक ही परिवार के 11 मृत
इस हादसे में प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में रहने वाले एक ही परिवार के 14 में से 11 लोगों की मौत हो गई. यह परिवार श्रीधाम रेलवे स्टेशन से जनता एक्सप्रेस में सवार होकर शिर्डी जा रहे थे. जिन लोगों की मौत हुई है उनमें दीपचंद रजक (40), दीप्ति रजक (35), गिंदाबाई (6 5), राजकुमारी रजक (25), रानू बाथरे (21), संगीता बाथरे (17), अंश बाथरे (3), अंशी बाथरे (6 ), सून्नाबाई (55), जिजीबाई (70), सुशीलाबाई (40) शामिल हैं.

 ग्रामीणों ने की सहायता

इस रेल दुर्घटना के तत्काल बाद करीबी ग्राम नीमसराय, कुड़ावा, हिवाला, बम्हनगांव के ग्रामीणों ने घटनास्थल पर पहुंचकर घायलों की मदद की. वहीं कुछ युवकों ने मृतकों के शवों को ट्रेन की बोगियों एवं पानी के बहाव में से बाहर निकालने में मदद की. कुछ यात्रियों को नीमसराय में गामीण कैलाश विश्नोई ने अपने घर में ठहराया. यह यात्री ट्रेन की बोगियों में से निकलकर बमुश्किल रात में गांव तक पहुंचे थे. मुख्यमंत्री ने इन ग्रामीणों को 15 अगस्त को सम्मानित करने की घोषणा की है.

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