haryanaगुडग़ांव,  जाट आंदोलन के नाम पर हुई भयानक हिंसा का विरोध करते हुए हरियाणा के 35 समुदायों ने साथ मिलकर इसका विरोध करने का निर्णय लिया है. समुदायों ने जाटों को सभी सामाजिक गतिविधियों से निष्कासित करने का फैसला लिया है.

उनकी मांग है कि दंगाइयों को हत्या का आरोप लगाया जाए. हरियाणा के 100 से अधिक गांवों ने साथ मिलकर एक महापंचायत के जरिए यह निर्णय लिया है. इस महापंचायत के प्रमुख मोहम्मदपुर झारसा गांव के सरपंच नाथु सिंह थे. गांव वाले दंगाइयों से बेदह नाराज हैं और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई चाहते हैं. मानेसर के पूर्व सरपंच ओम प्रकाश यादव का कहना है कि कोई भी अपने प्रभुत्व के लिए दूसरों की जान लेने का अधिकारी नहीं है. जाटों ने जो किया, वह असहनीय है. उन्होंने साथ मिलकर जाटों के विरोध का फैसला लिया है और जो भी समुदाय महापंचायत के आदेशों के खिलाफ जाएगा, उसके साथ भी जाटों जैसा व्यवहार ही किया जाएगा. महापंचायत के समर्थकों का मानना है कि जाटों का आंदोलन आरक्षण के लिए नहीं था बल्कि एक गैर-जाट मुख्यमंत्री के खिलाफ साजिश थी. जाटों 40 साल से प्रदेश पर राज्य कर रहे हैं इसलिए उनके कमजोर होने का सवाल ही नहीं उठता. मुख्यमंत्री फिलहाल सत्ता जाने के डर से दोषियों के मामले के संबंध में नर्मी से पेश आ रहे हैं लेकिन उन्हें इसकी जरूरत नहीं है. पंचायत में शामिल होने वाले समुदायों ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री की सत्ता को कोई खतरा नहीं होगा. हिंसा और लूट के जारी होने की जानकारी पुलिस को भी थी लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.

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