नई दिल्ली. भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) 1 अप्रैल, 2015 से शुरू हो रहे आगामी फसल सीजन से हरियाणा से की जाने वाली सालाना गेहूं खरीद को बंद कर देगा। इसके बजाय यह प्रक्रिया राज्य सरकारों के हवाले कर दी जाएगी। उम्मीद है कि 2016-17 के फसल सीजन से निगम पड़ोसी पंजाब से भी खरीद की प्रक्रिया को रोक देगा। केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल के लिहाज से करीब 80 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले इन दोनों राज्यों में एफसीआई सिर्फ 10-12 फीसदी खरीद करता है जबकि शेष खरीदारी राज्य की एजेंसियां ही करती हैं।
एफसीआई में सुधारों को लेकर बनाई गई शांता कुमार समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि निगम ने पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तरी राज्यों से खरीद करने के बजाय पूर्वी भारतीय राज्यों की ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है जहां खरीद प्रक्रिया कमजोर है। खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, हरियाणा ने अगले सीजन से गेहूं खरीद की पूरी प्रक्रिया का संचालन करने के लिए हामी भरी है। जबकि पंजाब में अभी थोड़ा समय लगेगा। हालांकि खाद्य विभाग चंडीगढ़ और पुडुचेरी में प्रायोगिक आधार पर नकद खाद्य सब्सिडी अंतरण के लिए कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है लेकिन पूरे देश में लागू करने के लिहाज से अभी कठिनाई होगी।

एफसीआई के हरियाणा से गेहूं नहीं खरीदने के फैसले के बाद राज्य सरकार ने कहा कि उसने गेहूं की खरीद के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं और आगामी खरीद विपणन वर्ष में किसानों को कोई असुविधा नहीं होगी। प्रदेश के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार अपनी खरीद एजेंसियों हाफेड, हरियाणा भंडारण निगम, हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन और कॉन्फेड के साथ मिलकर हरियाणा में केंद्र की ओर से किसानों का पूरा स्टॉक खरीदेगा। उन्होंने दावा किया, जहां तक किसानों का संबंध है, उनके लिए कुछ नहीं बदला है बजाय इसके कि इस वर्ष एफसीआई खरीद एजेंसियों का हिस्सा नहीं होगी। इससे किसानों के लिए कोई अंतर नहीं आएगा और उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।

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