shivaniउज्जैन, 10 अप्रैल,  सिंहस्थ मेला क्षेत्र में काली और लाल पताका फहराती एक कुटिया सभी के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है. इसमें विराजित हैं अघोरी तांत्रिक शिवानी दुर्गा जो अपने बयान और श्मशान जागृति की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई हैं. शिवानी का कहना है: हर इंसान अपने आप में तांत्रिक है, बस उसे अपने में छिपे इस स्वरूप को विकसित करने की जरूरत है. घर-घर में तांत्रिक क्रियाएं कर इसके सकारात्मक परिणामों से लाभ उठाया जाना चाहिए. किचन तो तंत्र का केन्द्र होता है.

शिवानी आम संन्यासियों से कुछ भिन्न हैं. विज्ञान और तंत्र पर शिकागो यूनिवर्सिटी से पीएचडी हैं. वे यहीं नहीं थमी. भारतीय प्राचीन वैदिक ज्ञान और तंत्र पर एक पीएचडी और कर ली. तंत्र पर ही ओंकारेश्वर ज्योतिष विद्यापीठ से तीसरी पीएचडी कर रही हैं. आपने पश्चिम देशों के तंत्र और भारतीय तंत्र विद्या के समागम पर भी अध्ययन किया है. ‘नवभारतÓ से विशेष बातचीत में वे कहती हैं: तंत्र के व्यापक शोध और अध्ययन के बाद कुछ नई पद्धतियां निकाली हैं. रिसर्च इस बात पर भी चल रहा है कि तंत्र से आम आदमी को कैसे ज्यादा से ज्यादा फायदा हो सकता है और उसकी हर छोटी-बड़ी समस्या से कैसे मुक्ति मिल सकती है.

शिवानी दुर्गा कहती हैं: कहा जाता है कि भगवत गीता भगवान की वाणी है. इसलिए उसका सम्मान होना चाहिए. तंत्र तो भगवान शिव के मुख से निकला है तो फिर उसका सम्मान क्यों नहीं होता? तंत्र का अर्थ जैसा हमें दिखाया गया है, वैसा नहीं है. मंत्र-क्रिया और ध्यान से तंत्र की उत्पत्ति है. हमारे शब्द भी मंत्र और ब्रह्म ही हैं. तंत्र में केवल सकारात्मकता पर फोकस होना चाहिए. मेरा मानना है कि घर-घर में तंत्र का प्रचार-प्रसार होना चाहिए. हम कार्यक्रमों में आम इंसान को तांत्रिक क्रियाओं से जोड़ते हुए यह बताएंगे कि किस तरह किचन तंत्र का केन्द्र होता है. जायफल और चंदन घिसने से क्या लाभ होते हैं.

केसर और इलायची के माध्यम से किस तरह आम आदमी तांत्रिक क्रियाएं करते हुए इसके लाभ प्राप्त कर सकता है. कैसे तंत्र के माध्यम से पूरे परिवार को जोड़कर आगे बढ़ा जा सकता है. आम इंसान और तंत्र के संबंध में मैंने सबसे पहले किचन को ही टारगेट किया है. रुचि बढऩे पर फिर आम इंसान को तंत्र के गूढ़ रहस्य की ओर ले जाऊंगी.

तंत्र घर-परिवारों में आ रही आर्थिक समस्याओं और आपसी संबंधों में कटुता का भी श्रेष्ठ समाधान दिखाता है. हम तंत्र को काले कपड़ों, मालाओं और धूम-धड़ाकों तक सीमित ना समझें. इसका दायरा व्यापक है. इसका मतलब सिस्टम से है. तंत्र का निगेटिव नहीं, पाजीटिव साइड जनमानस के सामने आना चाहिए.

क्रांति चतुर्वेदी

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