केन्द्र की मोदी सरकार ने देश में कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में हर गांव व हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की अत्यन्त महत्व की योजना 50 हजार करोड़ रुपयों से शुरू की है. यह कुल योजना व्यय का 75 प्रतिशत धनराशि होगी जो केन्द्रीय अनुदान है. इसमें 25 प्रतिशत धन राज्य सरकारों को मिलाना होगा.

यह देश में अब तक की सबसे बड़ी कृषि सिंचाई योजना है. इससे क्रियान्वयन होने पर देश में खाद्यान्न उत्पादन में 10 प्रतिशत से भी ज्यादा वृद्धि हो जायेगी. अभी खाद्यान्न वृद्धि दर का लक्ष्य 4 प्रतिशत प्रति वर्ष रहा है. इसके लिये हर राज्य में एक क्रियान्वयन समिति बनेगी जो इस योजना को पूरी तौर पर लागू करायेगी.

इसमें कहा गया है कि कृषि की मानसून पर निर्भरता को कम करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है. इसमे वृहत योजना में अभी तक चल रही सिंचाई योजनाओं को मिला दिया गया. इसके अंतर्गत केन्द्र के लिये राज्य स्तर और राज्यों के लिये जिला स्तर पर सिंचाई योजनाएं बनेंगी.

इस समय देश में 14 करोड़ से अधिक हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है और इसमें से 65 प्रतिशत भूमि पर सिंचाई उपलब्ध नहीं है केवल 35 प्रतिशत जमीन में सिंचाई है.

इतने बड़े भूभाग और जनसंख्या के देश का मानसून पर आश्रित रहना बड़ी हो जोखिम की स्थिति है और हमारा देश हमेशा से कृषि प्रधान रहा है.
लेकिन सिंचाई के साथ जल संरक्षण का काम भी इतना ही जरूरी है और उसके लिये भी समानान्तर इतनी बड़ी ही योजना चलनी चाहिए.

इसके लिए जरूरी होगा कि वर्षा का जल जो जंगल विहीन भूमि से बिना रुकावट तेजी से बहकर निकल जाता है, उसका संग्रहण करना होगा. शहरों में डामर-सीमेंट की सड़कें और आबादी के सघन आवासों से भूजल नहीं बन रहा है. शहरों में पानी संरक्षण के लिये छतों पर सौर ऊर्जा के साथ-साथ जल की खेती (वाटर हार्वेस्टिंग) करनी होगी. अब ट्यूबवैल की अधिकता भी देश को भूजल से वंचित कर रही है. इसलिये गांवों में परम्परागत चले आये खुले कुओं को फिर से प्रारंभ करना होगा.

अब यह भी मान लिया गया है कि बड़े बांधों पर जो करोड़ों और अरबों रुपया खर्च किया जाता है, उससे ज्यादा अच्छा यही होगा कि हर गांव का खुद का इतना बड़ा तालाब हो जो उसके पीने के पानी और आसपास के क्षेत्रों में खेती की सिंचाई कर सके. स्वच्छ भारत मिशन के तहत इनमें पालतू जानवरों को न उतरने दिया जाए. नहाने व कपड़े धोने के काम तट से काफी दूर पर पानी पहुंचाकर किये जाएं.

फिर भी प्रकृति का कभी कोई विकल्प नहीं हो सकता. यदि कभी वर्षा कम हुई और गर्मी तेज पड़ी तो पानी का अभाव झेलना पड़ेगा. कभी अति वर्षा हुई तो उसकी मार भी सहना पड़ेगी. इस साल कृषि बहुत अच्छी आ रही थी कि इसी बीच बेमौसम की बरसात हो गई और कृषि को भारी नुकसान पहुंच गया. गांवों के तालाब के आसपास वन व वन्य प्राणी की भी पानी की जरूरत की पूरी हो जायेगी.

देश में जल संरक्षण के लिये भूजल सबसे बड़ा सहारा है. जब भी जमीन पर जलाभाव की त्रासदी आयेगी देश का भूजल ही सहारा होगा. शहरों में अत्याधिक निर्माण से बचा नहीं जा सकता, लेकिन हर घर की छत से कम से कम उस बस्ती के लिये वाटर हार्वेस्टिंग कर भूजल से जनजीवन सुरक्षित किया जा सकता है.

देश की सभी योजनाओं का आधार जल और ऊर्जा ही है. हमारे पास भरपूर मानसून की वर्षा और भरपूर सौर ऊर्जा है. ऊंची छतों पर, पसरे गांवों में इन दोनों का भरपूर दोहन करना है. हमारे वैज्ञानिक व सरकारें इस काम में जुट जायें.

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