सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण अब अपनी सीमाएं तोड़ कर सर्वजातीय हो गया है. अब मूल प्रश्न कि अछूत माने जाने वाले दलित वर्ग और घने जंगलों व पहाड़ों में रहने वाले आदिवासी और गिरिजन न तो मुखर रहे हैं और इस समय न कोई उनकी ओर ध्यान दे रहा है.

संविधान निर्माण के समय आरक्षण के प्रणेता डाक्टर अंबेडकर ने अछूतों व आदिवासियों के लिये 10 साल के आरक्षण की व्यवस्था करायी थी. मूल व्यवस्था राष्टï्र व समाज की जरूरत थी. लेकिन बीच में मात्र 11 महीने सत्ता व प्रधानमंत्री रहे श्री वी.पी. सिंह ने मंदिर-मंडल की प्रतिद्वंदी राजनीति में मंडल कमीशन के नाम पर ‘अन्य पिछड़े वर्गों’ को आरक्षण देकर आरक्षण के मूल विचार ध्वस्त कर दिये. पिछड़ों के नाम पर अनेकों जातियों के आरक्षण में आ जाने से बाकी बची जातियों के युवा वर्ग के सामने नौकरी व शिक्षण संस्थाओं में भर्ती के अवसर स्वत: ही कम हो गये.

हर जाति को आरक्षण में अपनी जगह बनाने की जरूरत महसूस हुई. हर जाति की मांग की बाढ़ आ गयी और इसी से मूल आरक्षण बह गया. राजस्थान में एक बड़ा समुदाय मीणा जाति का है. इन्होंने 27 प्रतिशत पिछड़े लोगों को आरक्षण मिल जाने के बाद मीणा जाति के लिये 5 प्रतिशत आरक्षण पा लिया. यही आरक्षण ‘जाटोÓ को भी आरक्षण के लिये उकसा गया. आर्थिक दृष्टिï से जाट संपन्न किसान वर्ग का है. पंजाब के दबंग मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरो…. यह गर्व या दम्भ के साथ कहा करते थे कि जाट सिख है. जाट का मतलब अच्छी जमीन और बड़ा किसान होता है. यही स्थिति गूजरों की है. वे भी मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा में फैले हुए हैं. ये भी किसानों की सम्पन्न जाति है. ये भी आरक्षण मांग रहे हैं. गुजरात में पाटीदार जो पटेल के नाम से ज्यादा जाने जाते हैं वे भी गुजरात का अति सम्पन्न वर्ग और बड़े किसान हैं. सिर्फ आरक्षण की मांग उठायी और एक गुमनाम व्यक्ति हार्दिक पटेल रातोंरात देश का एक बड़ा जातीय नेता बन गया.

अब आरक्षण आर्थिक मांग या समस्या नहीं है. अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमान और जैन समुदाय भी आरक्षण मांग रहा है. बीच में न्यायपालिका भी सुप्रीम कोर्ट स्तर पर इस विवाद के लपेट में आ रही है.

आंध्र अल्पसंख्यक के नाम पर मुसलमानों को आरक्षण दिया गया- सुप्रीम कोर्ट ने उसे इस आधार पर रद्द कर दिया कि धर्म के आधार पर आरक्षण अवैध है. इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने जाटों के लिए आरक्षण देने को रद्द कर दिया है. हाल ही में जाटों ने हरियाणा में खासकर रोहतक नगर में जिस तरह गुंडागिरी का आंदोलन चलाया उससे उस राज्य में सभी गैर जातियां जाटों के विरुद्ध एकजुट होकर उन्हें बहिष्कृत कर रही है. जाति आरक्षण जाति संघर्ष हो गया और अब भारत में वर्ग संघर्ष नहीं जाति संघर्ष का दौर आ गया है. इसका एकमात्र निदान व समाधान यही है कि वी.पी. सिंह के राजनैतिक ….. से इस देश को मुक्त व पवित्र किया जाए और संविधान में जिन वर्गों को आरक्षण दिया गया वहीं तक सीमित
रखा जाए.

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